India-US Relations: प्रधानमंत्री Narendra Modi और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की 17 जून को France में प्रस्तावित मुलाकात को लेकर देश की राजनीति में गर्माहट बढ़ गई है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वर्ष 2025 के बाद से वैश्विक स्तर पर कई महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक घटनाक्रम सामने आए हैं। दोनों नेताओं की यह मुलाकात रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है। हालांकि, इस उच्च स्तरीय बैठक से पहले ही Congress Party ने केंद्र सरकार पर सवालों की बौछार कर दी है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री Modi से पूछा है कि क्या वे इस मुलाकात में उन गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को उठाएंगे जो हाल के महीनों में सामने आए हैं।
India-US Relations: कांग्रेस ने उठाए विदेश नीति और सुरक्षा से जुड़े सवाल
कांग्रेस ने कहा है कि प्रधानमंत्री Modi, जिन्हें Trump का 'Self-Proclaimed Good Friend' बताया जाता है, अब एक बार फिर उनसे मुलाकात करने जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि फरवरी 2025 के बाद यह दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने की मुलाकात होगी।
कांग्रेस ने सवाल किया है कि क्या इस बैठक में भारत अपने नागरिकों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को मजबूती से उठाएगा। विशेष रूप से पार्टी ने ओमान तट के पास हुए एक कथित अमेरिकी हमले का मुद्दा उठाया है, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत का दावा किया गया था। कांग्रेस ने कहा कि भारत सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा तो की है, लेकिन अब यह देखना होगा कि क्या प्रधानमंत्री इस मुद्दे को अमेरिकी नेतृत्व के सामने उठाते हैं या नहीं।
विदेश मंत्री की बातचीत और कथित ‘धमकी भरी भाषा’ पर सवाल
कांग्रेस ने विदेश नीति से जुड़े एक और मुद्दे पर सरकार को घेरा है। पार्टी ने 12 जून 2026 को विदेश मंत्री
S. Jaishankar और अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio के बीच हुई बातचीत का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें कथित तौर पर 'Threatening and Unacceptable Language' का इस्तेमाल किया गया था।
कांग्रेस ने पूछा है कि क्या प्रधानमंत्री Modi इस कथित व्यवहार को Trump के सामने उठाएंगे और India-US Relations के संदर्भ में भारत की स्थिति स्पष्ट करेंगे या नहीं। पार्टी का कहना है कि ऐसे मामलों में भारत को अपने राजनयिक सम्मान और संप्रभुता की रक्षा करनी चाहिए।
ट्रेड डील और आर्थिक समझौते पर भी निशाना
Trade Security Talks: कांग्रेस ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी सरकार की आलोचना की है। पार्टी ने दावा किया कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर जल्द ही भारत आने वाले हैं ताकि द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जा सके।
कांग्रेस का आरोप है कि यह समझौता भारत के लिए असंतुलित और एकतरफा हो सकता है। पार्टी ने कहा कि फरवरी 2026 में राष्ट्रपति Trump द्वारा घोषित एक अंतरिम व्यापार ढांचे के तहत भारत पर भारी आर्थिक दबाव डाला गया है।
कांग्रेस के अनुसार, उस समय यह घोषणा की गई थी कि भारत ने अमेरिका से अगले पांच वर्षों में लगभग 500 अरब डॉलर का आयात करने की प्रतिबद्धता जताई है, जिससे भारत का आयात काफी बढ़ जाएगा। पार्टी ने इसे भारतीय किसानों और घरेलू उद्योगों के लिए जोखिम भरा करार दिया।
अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य और भारत की स्थिति पर बहस
कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि वैश्विक स्तर पर कुछ देशों ने अमेरिका के साथ अपने व्यापारिक समझौतों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उदाहरण के तौर पर मलेशिया जैसे देशों का हवाला देते हुए कहा गया कि उन्होंने अमेरिकी Supreme Court के एक फैसले के बाद अपने कुछ व्यापार समझौतों को अमान्य घोषित किया है।
पार्टी ने कहा कि ऐसे हालात में भारत सरकार की चुप्पी और निष्क्रियता India-US Relations पर भी सवाल खड़े करती है। कांग्रेस का कहना है कि भारत को केवल औपचारिक बयानों और फोन कॉल तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपनी आर्थिक और राजनीतिक संप्रभुता की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि Modi सरकार ने चीन से जुड़े मुद्दों पर भी पर्याप्त मजबूती नहीं दिखाई और संसद में इस विषय पर विपक्ष के सवालों के जवाब देने में असहज रही है। पार्टी ने यह भी कहा कि मौजूदा व्यापार समझौते भारत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं, क्योंकि इनमें घरेलू हितों की अनदेखी की गई है। पार्टी ने कहा कि भारत को किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में संतुलन और पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए, ताकि किसानों और उद्योगों के हित प्रभावित न हों।
अहम बैठक पर निगाहें
फ्रांस में होने वाली Modi-Trump मुलाकात अब केवल एक कूटनीतिक बैठक नहीं रह गई है, बल्कि यह राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुकी है। कांग्रेस के तीखे सवालों ने इस बैठक के
Agenda को और अधिक चर्चा में ला दिया है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या प्रधानमंत्री Modi इन मुद्दों को अमेरिकी नेतृत्व के सामने मजबूती से उठाएंगे या यह मुलाकात केवल औपचारिक बातचीत तक सीमित रह जाएगी।
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