Maharashtra Birth Certificate: महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई में जन्म प्रमाणपत्रों से जुड़े एक बड़े मामले में सख्त कार्रवाई का आदेश जारी किया है। सरकार ने 2024 से 2026 के बीच किए गए कुल 19,734 जन्म प्रमाणपत्र संशोधनों को रद्द करने का निर्देश दिया है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि जन्म प्रमाणपत्रों को पूरी तरह निरस्त नहीं किया जाएगा, बल्कि उनमें किए गए नियमों के खिलाफ बदलावों को हटाकर मूल रिकॉर्ड को पुनः बहाल किया जाएगा।
यह फैसला स्वास्थ्य सेवा आयुक्तालय, पुणे द्वारा जारी निर्देशों के बाद सामने आया है, जिसमें मुंबई के जिला रजिस्ट्रार और संबंधित अधिकारियों को विस्तृत जांच कर मूल रिकॉर्ड को पुनः स्थापित करने के आदेश दिए गए हैं।
Maharashtra Birth Certificate: उल्लंघन और दस्तावेजों की कमी बनी वजह
Birth Certificate Changes: सरकारी जांच में यह सामने आया कि बड़ी संख्या में जन्म प्रमाणपत्र संशोधन ऐसे थे जिनमें निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 और महाराष्ट्र जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण नियम, 2000 के तहत जो प्रक्रिया तय की गई है, उसके अनुसार आवश्यक दस्तावेज और सत्यापन अनिवार्य होते हैं, लेकिन कई मामलों में इसका पालन नहीं किया गया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कुल 19,734 मामलों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। इनमें से 16,528 मामलों में किसी भी प्रकार के सहायक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए थे। वहीं 3,206 मामलों में दस्तावेज अधूरे पाए गए। इन्हीं आधारों पर इन सभी संशोधनों को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
जांच के घेरे में आए कई अधिकारी
इस मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब यह सामने आया कि कुछ मामलों में बिना उचित सत्यापन के जन्म पंजीकरण को मंजूरी दी गई थी। आरोप है कि मुंबई नगर निगम (BMC) के कुछ पूर्व स्वास्थ्य अधिकारियों ने नियमों को नजरअंदाज करते हुए कई पंजीकरणों को हरी झंडी दी, जिससे
Maharashtra Birth Certificate से जुड़े रिकॉर्ड पर सवाल खड़े हो गए।
इस पूरे मामले की जांच अब अपराध शाखा की विशेष जांच टीम (SIT) को सौंप दी गई है। SIT यह जांच कर रही है कि किन परिस्थितियों में इतने बड़े पैमाने पर संशोधन किए गए और क्या इसमें किसी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत शामिल थी।
फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों को लेकर राजनीतिक विवाद
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब भारतीय जनता पार्टी के नेता और महाराष्ट्र एसआईआर प्रमुख Kirit Somaiya ने इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जन्म प्रमाणपत्र ऐसे अस्पतालों के नाम पर जारी किए गए हैं जिनका अस्तित्व ही नहीं है।
Somaiya ने यह भी दावा किया कि ऐसे फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल अवैध रूप से पहचान संबंधी दस्तावेज हासिल करने के लिए किया जा सकता है। उनके आरोपों के बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया।
अवैध पहचान दस्तावेजों के दुरुपयोग की आशंका
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की अनियमितताओं से पहचान दस्तावेजों के दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाती है। जन्म प्रमाणपत्र एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जिसका उपयोग Aadhaar Card, Passport
और अन्य सरकारी पहचान पत्र बनाने में किया जाता है। ऐसे में यदि इसमें गलत जानकारी दर्ज हो, तो यह आगे चलकर बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का कारण बन सकता है।
इसी आशंका को देखते हुए सरकार ने इन सभी मामलों की गहराई से जांच कराने का निर्णय लिया है और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है।
पहले भी उठ चुके हैं फर्जीवाड़े के आरोप
Mumbai Certificate Cancellation से पहले भी मुंबई में फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग पर समय-समय पर यह आरोप लगते रहे हैं कि सत्यापन प्रक्रिया में ढिलाई बरती जाती है। हालांकि इस बार मामला बड़े पैमाने पर सामने आया है, जिसमें हजारों संशोधन एक साथ जांच के घेरे में आ गए हैं।
बांग्लादेशी नागरिकों को प्रमाणपत्र जारी होने का आरोप
इस विवाद के बीच एक और गंभीर आरोप सामने आया है। मुंबई की मेयर Ritu Tawde ने इस साल जनवरी में हुई एक समीक्षा बैठक के बाद दावा किया था कि 267 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बांग्लादेशी नागरिकों को जारी किए गए हैं। इस बयान के बाद भी प्रशासन पर दबाव और बढ़ गया था कि पूरे सिस्टम की गहन समीक्षा की जाए।
सरकार का रुख और आगे की कार्रवाई
महाराष्ट्र सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि Maharashtra Birth Certificate से जुड़े इन मामलों की विस्तृत जांच की जाए और रिपोर्ट पुणे स्थित उप मुख्य रजिस्ट्रार को सौंपी जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि भविष्य में इस तरह की अनियमितताएं न हों।
सरकार का कहना है कि यह कदम किसी भी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य रिकॉर्ड को सही करना और प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है। जिन मामलों में दस्तावेज सही पाए जाएंगे, उन्हें प्रभावित नहीं किया जाएगा, लेकिन जहां नियमों का उल्लंघन हुआ है, वहां मूल रिकॉर्ड बहाल किया जाएगा।
मुंबई में जन्म प्रमाणपत्रों से जुड़े इस बड़े फैसले ने प्रशासनिक व्यवस्था और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 19,734 मामलों की समीक्षा और संशोधनों को रद्द करने का यह कदम सरकार की ओर से पारदर्शिता और सख्ती दिखाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। आने वाले समय में SIT की जांच और सरकारी रिपोर्ट यह तय करेगी कि इस पूरे मामले में किस स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी हुई थी।
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