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Mamata Banerjee Plan: बशीरहाट से संसद पहुंचने की नई रणनीति
06 Jun 2026
Mamata Banerjee Plan: पश्चिम बंगाल की राजनीति विधानसभा चुनावों के बाद भी शांत होती नजर नहीं आ रही है। चुनाव खत्म हुए एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर उठ रहे सवाल और नेताओं के बीच बढ़ती असहमति लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं। इस बीच बहरामपुर लोकसभा सीट को लेकर सामने आई एक नई राजनीतिक खींचतान ने राज्य की राजनीति को और गर्म कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और TMC प्रमुख Mamata Banerjee चाहती थीं कि पार्टी सांसद Yusuf Pathan बहरामपुर लोकसभा सीट से इस्तीफा दें। माना जा रहा था कि इस सीट से उपचुनाव कराकर ममता बनर्जी खुद संसद पहुंचने की रणनीति बना रही थीं। हालांकि यूसुफ पठान ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और सांसद पद छोड़ने से साफ मना कर दिया।
Mamata Banerjee Plan: जनादेश का सम्मान सबसे ऊपर: यूसुफ पठान
Parliament Entry Strategy: बहरामपुर से सांसद Yusuf Pathan ने अपने फैसले के पीछे की वजह भी स्पष्ट कर दी है। उनका कहना है कि जनता ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनकर संसद भेजा है और इस जनादेश को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।
यूसुफ ने कहा कि उन्हें सांसद बने अभी केवल दो वर्ष हुए हैं। ऐसे में जनता द्वारा दिए गए भरोसे और जिम्मेदारी को बीच में छोड़ना उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह बहरामपुर लोकसभा सीट से इस्तीफा नहीं देंगे और अपने कार्यकाल को पूरा करना चाहते हैं।
Yusuf Pathan
के इस रुख को राजनीतिक गलियारों में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने पार्टी नेतृत्व की इच्छा से अलग जाकर अपना स्वतंत्र निर्णय सार्वजनिक रूप से रखा है।
सौरव गांगुली का नाम भी आया चर्चा में
इस पूरे घटनाक्रम में पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान Sourav Ganguly का नाम भी चर्चा में आ गया। खबरें सामने आई थीं कि ममता बनर्जी ने सौरव गांगुली से अनुरोध किया था कि वे यूसुफ पठान से बातचीत कर उन्हें इस्तीफा देने के लिए मनाएं।
हालांकि Sourav Ganguly ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस तरह की कोई मध्यस्थता नहीं की है और न ही Yusuf Pathan से इस विषय पर कोई बातचीत की है। गांगुली के खंडन के बाद इस मामले को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया।
मुर्शिदाबाद में अलग-अलग सुर
टीएमसी के भीतर इस मुद्दे पर एकराय दिखाई नहीं दे रही है। जहां एक ओर यूसुफ पठान ने पार्टी प्रमुख की इच्छा मानने से इनकार कर दिया, वहीं दूसरी ओर मुर्शिदाबाद से जुड़े एक अन्य नेता हुमायूं कबीर ने Mamata Banerjee Plan के प्रति खुला समर्थन जताया है।
टीएमसी से निलंबित विधायक और एजेयूपी (AJUP) के चेयरमैन हुमायूं कबीर ने कहा कि यदि ममता बनर्जी बशीरहाट लोकसभा सीट से संसद जाना चाहती हैं तो वह हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार हैं। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब बहरामपुर सीट को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी आने वाले समय में मुर्शिदाबाद और आसपास के इलाकों में अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करने की कोशिश कर सकती हैं। इसी वजह से इन क्षेत्रों को लेकर पार्टी के भीतर भी गतिविधियां बढ़ी हुई हैं।
टीएमसी के भीतर बढ़ रही नाराजगी?
बहरामपुर सीट विवाद ऐसे समय सामने आया है जब तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और सांसदों की नाराजगी की खबरें भी चर्चा में हैं। पार्टी के कामकाज और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर कई नेताओं ने Mamata Banerjee Plan पर अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रूप से असहमति जताई है।
इन नेताओं में वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। बारासात से चार बार सांसद रह चुकीं दस्तीदार को ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिना जाता है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को शिकायत देकर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी पर सदन के भीतर अभद्र व्यवहार और अपशब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाया है।
दस्तीदार के अलावा पार्टी के वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर रॉय और शांतनु सेन भी संगठन के कामकाज को लेकर सवाल उठा चुके हैं। इन बयानों ने यह संकेत दिया है कि पार्टी के भीतर कुछ मुद्दों को लेकर असंतोष मौजूद है।
आगे क्या होगा?
यूसुफ पठान द्वारा इस्तीफा देने से इनकार करने के बाद राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी संसद पहुंचने के लिए किस सीट को चुनती हैं और पार्टी नेतृत्व इस स्थिति को किस तरह संभालता है।
फिलहाल इतना तय है कि बहरामपुर सीट को लेकर शुरू हुआ यह विवाद केवल एक संसदीय सीट का मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसने टीएमसी के भीतर चल रही राजनीतिक हलचलों और नेतृत्व से जुड़े सवालों को भी सामने ला दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा West Bengal Politics में और बड़ी बहस का कारण बन सकता है।