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Tamil Nadu Alliance: DMK-कांग्रेस अलग हुए, संसद में दूरी बढ़ी
05 Jun 2026
Tamil Nadu Alliance: लोकसभा में राजनीतिक समीकरणों में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है, जहां अब द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और कांग्रेस एक साथ बैठते नजर नहीं आएंगे। लोकसभा सचिवालय ने DMK की उस मांग को मंजूरी दे दी है, जिसमें पार्टी ने अपने सांसदों के लिए अलग सीटिंग व्यवस्था की अपील की थी। इस निर्णय के बाद संसद के भीतर दोनों दलों की भौतिक निकटता भी समाप्त हो गई है, जो पहले गठबंधन सहयोगी होने के चलते बनी रहती थी।
DMK की ओर से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब तमिलनाडु की राजनीति में हाल ही में बड़े बदलाव हुए हैं और वहां कांग्रेस की नई राजनीतिक साझेदारियों को लेकर असंतोष की स्थिति बनी है।
Tamil Nadu Alliance: सीटिंग बदलाव के पीछे क्या है असली वजह
Lok Sabha Seating: DMK के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी कांग्रेस के साथ पहले जैसी सहजता महसूस नहीं कर रही है। इसी कारण पार्टी ने लोकसभा स्पीकर Om Birla को पत्र लिखकर अपने सांसदों के लिए अलग सीटें निर्धारित करने का अनुरोध किया था।
DMK की ओर से यह मांग पार्टी सांसद Kanimozhi Karunanidhi द्वारा औपचारिक रूप से रखी गई थी। उनका कहना था कि बदलते राजनीतिक हालात को देखते हुए संसद के भीतर बैठने की व्यवस्था को पुनर्गठित करना जरूरी हो गया है। लोकसभा सचिवालय ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए DMK के सांसदों के लिए नई सीटिंग व्यवस्था लागू कर दी है।
इस बदलाव के बाद अब संसद में DMK और कांग्रेस के सांसद न तो एक-दूसरे के पास बैठेंगे और न ही पहले जैसी संसदीय साझेदारी की दृश्यता दिखाई देगी।
तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ी दूरियां
इस घटनाक्रम की जड़ें तमिलनाडु की राजनीति में देखी जा रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में हाल ही में बने नए राजनीतिक समीकरणों में कांग्रेस की भागीदारी और उसकी रणनीतिक साझेदारियों ने Tamil Nadu Alliance के भीतर DMK को असहज कर दिया है।
कहा जा रहा है कि विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस ने DMK के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था, लेकिन परिणामों के बाद राजनीतिक रिश्तों में खटास आ गई। कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में केवल 5 सीटों पर जीत मिली थी, लेकिन बाद में उसने सरकार गठन में TVK का समर्थन किया और नई राज्य सरकार के साथ जुड़ गई।
DMK नेताओं ने इस कदम को बेहद गंभीरता से लिया और इसे राजनीतिक विश्वासघात के रूप में देखा। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कांग्रेस के इस रुख की आलोचना की और इसे 'पीठ में छुरा घोंपने' और 'धोखाधड़ी' जैसा कदम बताया।
INDIA ब्लॉक से भी दूरी बनाने का ऐलान
Political Realignment India: सिर्फ संसद की सीटिंग व्यवस्था ही नहीं, बल्कि DMK ने विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक से भी दूरी बनाने का निर्णय लिया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह 8 जून को नई दिल्ली में होने वाली INDIA ब्लॉक की अगली बैठक में शामिल नहीं होगी।
DMK के वरिष्ठ नेता TKS Elangovan ने बयान देते हुए कहा कि वर्तमान स्थिति में पार्टी अब INDIA ब्लॉक का हिस्सा नहीं रह गई है। उनके अनुसार, जब राजनीतिक सहयोग की मूल भावना ही प्रभावित हो गई हो, तो ऐसे मंचों पर उपस्थिति का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
यह फैसला विपक्षी गठबंधन के लिए भी एक बड़ा संकेत माना जा रहा है, क्योंकि DMK दक्षिण भारत में एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शक्ति मानी जाती है और उसके रुख से गठबंधन की रणनीति पर असर पड़ सकता है।
कांग्रेस का पक्ष और राजनीतिक सफाई
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने अपने रुख को सही ठहराते हुए कहा है कि राजनीतिक परिस्थितियां समय के साथ बदलती रहती हैं। पार्टी का तर्क है कि जैसे DMK ने 2014 के चुनाव अकेले लड़े थे, वैसे ही गठबंधन और रणनीति बदलना राजनीति का हिस्सा है।
कांग्रेस का यह भी कहना है कि तमिलनाडु में TVK के साथ उसके नए समीकरण क्षेत्रीय राजनीतिक जरूरतों के अनुसार बने हैं, और इसका उद्देश्य राज्य की राजनीतिक स्थिरता और प्रभावी शासन को समर्थन देना है।
नए राजनीतिक समीकरणों का संकेत
DMK और कांग्रेस के बीच यह बढ़ती दूरी केवल संसद की सीटिंग व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक राजनीतिक संबंधों में बदलाव का संकेत देती है। Tamil Nadu alliance में INDIA ब्लॉक से DMK का अलग होना विपक्षी गठबंधन के भीतर नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह दूरी स्थायी रूप लेती है या फिर राजनीतिक संवाद के जरिए दोनों दल किसी नए संतुलन तक पहुंचते हैं।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह DMK और कांग्रेस के रिश्तों में पहले जैसी गर्मजोशी अब नहीं रही, और भारतीय राजनीति में एक नया मोड़ सामने आ चुका है।
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