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India Economic Growth: निवेश और सुधारों से मजबूत होती अर्थव्यवस्था
04 Jun 2026
India Economic Growth: केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए आयकर कानून में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसके लिए कैबिनेट ने अध्यादेश को मंजूरी दे दी है, जिसे राष्ट्रपति की सहमति के बाद लागू किया जाएगा। इस बदलाव के तहत, Foreign Portfolio Investors (FPI) अब भारत की सरकारी प्रतिभूतियों (G-secs) में निवेश पर मिलने वाले मुनाफे पर Capital Gains Tax से पूरी तरह मुक्त होंगे।
सरकार का यह कदम मुख्य रूप से दो कारणों से उठाया गया है। पहला, विदेशी पूंजी के प्रवाह को बढ़ाना और दूसरा, ईरान युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के कारण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम करना। वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने इस फैसले के पीछे निवेशकों की मांगों और वैश्विक निवेशकों की प्रतिक्रिया को अहम बताया है।
India Economic Growth: विदेशी निवेशकों पर पुराने नियम और उनका असर
इससे पहले विदेशी निवेशकों को भारत में 12 महीने से अधिक समय तक रखे गए बॉन्ड और लिस्टेड शेयरों पर 12.5% का Long-Term Capital Gains (LTCG) टैक्स देना पड़ता था। इसके अलावा, सरकारी बॉन्ड्स से प्राप्त ब्याज पर 20% का Withholding tax भी लागू होता था।
विशेष बात यह है कि 2023 में सरकार ने 5% की रियायती दर को खत्म कर दिया था। इसके बाद विदेशी निवेशकों की नाराजगी बढ़ी, क्योंकि इस साल उनके द्वारा किए गए निवेश में भारी बिकवाली हुई। अकेले 2026 में ही विदेशी निवेशकों ने ₹2.5 लाख करोड़ की बिकवाली की, जिससे सरकार पर टैक्स में कटौती की मांग बढ़ गई।
कैपिटल गेन्स टैक्स में राहत से निवेश में आएगी तेजी
Investment Policy Reform: नए अध्यादेश के लागू होने के बाद विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड्स से होने वाली कमाई पर टैक्स नहीं देना पड़ेगा। इसका सीधा असर यह होगा कि FPIs भारत में लंबे समय तक निवेश बनाए रखेंगे, जिससे विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा।
Atom Financial Services के ग्रुप CEO, Harsha Vardhana VM के अनुसार, पिछले कुछ समय में विदेशी निवेशकों का व्यवहार काफी चिंताजनक रहा है। 2025 के 12 महीनों में से आठ महीनों में FPIs भारत में नेट सेलर रहे और कुल ₹1,66,286 करोड़ का Outflow हुआ। अकेले जनवरी 2026 में ₹33,598 करोड़ का आउटफ़्लो रिकॉर्ड किया गया, जो अगस्त 2025 के बाद सबसे बड़ा मासिक Outflow था।
सरकार के और कदम की संभावना
सूत्रों के अनुसार, यह सिर्फ पहला कदम है। India Economic Growth को मजबूत करने के लिए भारत सरकार भविष्य में और भी बड़े वित्तीय कदम उठा सकती है ताकि देश में विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हो और वैश्विक निवेश आकर्षित हो। वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman पहले ही कह चुकी हैं कि वह Long-Term और Short-Term Capital Gains पर टैक्स दरों को कम करने के लिए निवेशकों की राय जानने के लिए तैयार हैं।
2024 में पेश केंद्रीय बजट में भी LTCG टैक्स की दर को 10% से बढ़ाकर 12.5% कर दिया गया था। वहीं, Listed Equity और Equity-Linked Instruments पर छूट की सीमा को बढ़ाकर ₹1.25 लाख कर दिया गया था। इस निर्णय का मकसद निवेशकों के लिए थोड़ी राहत देना था, लेकिन विदेशी निवेशकों के भारी Outflow के बाद और कदम उठाने की जरूरत महसूस हुई।
निवेशकों के लिए संकेत और अर्थव्यवस्था पर असर
Market Growth Measures: विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे FPIs के लिए भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश आकर्षक बनेगा, जिससे Stock Market और Bond Market में स्थिरता आएगी।
सरकार का यह कदम आर्थिक विकास को गति देने की रणनीति का हिस्सा भी है। विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ने से देश में रोजगार, निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में और भी सुधार किए गए, तो भारत का वैश्विक निवेश आकर्षण और मजबूत होगा।
केंद्र सरकार का यह फैसला विदेशी निवेशकों के भरोसे को मजबूत करेगा और India Economic Growth में नई जान फूंकने में मदद करेगा। LTCG टैक्स की राहत से FPIs अब लंबी अवधि के निवेश के लिए भारत को प्राथमिकता देंगे। इससे न केवल बाजार में स्थिरता आएगी, बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत होगा।
न केवल यह कदम, बल्कि आने वाले समय में उठाए जाने वाले और कदम भारत को वैश्विक निवेश के लिए और भी आकर्षक बनाएंगे। निवेशक और विशेषज्ञ इस बदलाव को स्वागत योग्य बता रहे हैं, जिससे अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
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