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Mamata Banerjee Challenge: ऋतब्रत बनर्जी की बगावत से TMC में संकट

 04 Jun 2026

Mamata Banerjee Challengeबंगाल की राजनीति में अचानक भूचाल आया है। टीएमसी के प्रमुख नेता ऋतब्रत बनर्जी ने अब पार्टी से बगावत कर दी है और अपने साथ 58 विधायकों को लेकर विपक्ष के नेता (Leader of Opposition) बन गए हैं। ममता बनर्जी के लिए यह राजनीतिक चुनौती और संगठन को बचाने का संकट दोनों बढ़ा देता है। आइए जानते हैं कि कौन हैं ऋतब्रत बनर्जी और कैसे उन्होंने टीएमसी की राजनीतिक स्थिति को हिला दिया।


Mamata Banerjee Challenge: सीपीएम से टीएमसी तक का सफर

Ritabrata Banerjee का राजनीतिक करियर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। कोलकाता के साउथ प्वाइंट हाई स्कूल, आशुतोष कॉलेज और कलकत्ता यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र ऋतब्रत ने साल 2000 में सुर्खियां बटोरीं, जब उन्हें CPI(M) के छात्र संगठन SFI का अखिल भारतीय महासचिव बनाया गया। उनके तेज राजनीतिक उत्थान का कारण था सीताराम येचुरी के साथ करीबी रिश्ता।

34 साल की उम्र में वह राज्यसभा सांसद बने। हालांकि 2017 में CPI(M) ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में सस्पेंड और बाद में निष्कासित कर दिया। इसके पीछे उनकी जीवनशैली को पार्टी के आदर्शों के विपरीत बताया गया। 2018 में Ritabrata Banerjee ने TMC का दामन थामा और पार्टी की ट्रेड यूनियन शाखा के प्रमुख बने। उन्होंने कहा कि Mamata Banerjee असली वामपंथी नेता हैं। 2024 में TMC ने उन्हें राज्यसभा में मनोनीत किया और 2026 विधानसभा चुनाव में उन्होंने उलुबेरिया पुरबा सीट पर शानदार जीत दर्ज की।

पार्टी से निष्कासन और बगावत

TMC Rebellion Face: 1 जून, 2026 को टीएमसी ने Ritabrata Banerjee को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया। उनके साथ पार्टी ने Sandipan Saha को भी बाहर किया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब दोनों नेताओं ने विधानसभा अध्यक्ष को सूचित किया था कि उन्होंने TMC के पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए थे, जिसमें Chattopadhyay को विपक्ष का नेता नामित किया गया था।

ऋतब्रत ने बाद में 58 विधायकों के समर्थन के साथ विधानसभा में जाकर विपक्ष के नेता बनने की मांग की, जिसे स्पीकर ने स्वीकार कर लिया। यह घटना ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई।

कौन हैं ऋतब्रत बनर्जी? 

Ritabrata Banerjee ने छात्र राजनीति से लेकर राज्यसभा तक का सफर तय किया है। उन्होंने सीपीएम में तेज़ी से अपनी जगह बनाई, लेकिन पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित हो गए। TMC में शामिल होने के बाद उन्होंने पार्टी के Trade Union Branch का नेतृत्व किया और कई महत्वपूर्ण पद संभाले। 

उनकी राजनीतिक छवि विवादों से भी जुड़ी रही है। 2018 में उन पर एक शोधार्थी ने शादी का झूठा वादा देने और शोषण करने का आरोप लगाया। ऋतब्रत ने इस पर महिला पर ब्लैकमेल और जबरन वसूली का आरोप लगाया।

ममता बनर्जी और पार्टी के लिए चुनौती 

Ritabrata Banerjee की बगावत ने TMC में भारी राजनीतिक संकट पैदा कर दिया है। पार्टी के प्रमुख चेहरे अलग हो रहे हैं और संगठन के अस्तित्व को लेकर चिंता बढ़ गई है। ममता ने आरोप लगाया कि पार्टी तोड़ने की साजिश दिल्ली से रची गई थी। Ritabrata का कहना है कि वे Mamata के साथ हैं, लेकिन उनके भतीजे अभिषेक के साथ विवाद के कारण पार्टी में टकराव हुआ। उन्होंने संसदीय दल का सलाहकार बनने की अपील की और कहा कि वे सदन में BJP का डटकर सामना करेंगे, जिसे राजनीतिक गलियारों में Mamata Banerjee Challenge के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक प्रभाव 

West Bengal Politicsबंगाल में यह घटना TMC के लिए बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखी जा रही है। पार्टी की ब्रांचों और विधायकों के बीच असंतोष बढ़ रहा है। विपक्ष के नेता बनने के साथ Ritabrata Banerjee TMC के अस्तित्व और संगठनात्मक संरचना के लिए चुनौती बन गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में TMC को और बड़े झटके लग सकते हैं, क्योंकि पार्टी के भीतर कई प्रमुख चेहरे पहले ही अलगाव की ओर बढ़ रहे हैं।

Ritabrata Banerjee का TMC से बगावत करना न सिर्फ Mamata Banerjee के लिए व्यक्तिगत झटका है, बल्कि पार्टी और संगठन दोनों के अस्तित्व को चुनौती देता है। बंगाल की राजनीति में यह एक नया मोड़ साबित हो रहा है और राजनीतिक विशेषज्ञ इसे Mamata Banerjee Challenge के रूप में देख रहे हैं, जिसका असर आने वाले दिनों में पूरी राजनीतिक तस्वीर बदल सकता है।

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