Article

Punjab Education Model: सरकारी स्कूलों से नंबर-1 बनने की कहानी

 01 Jun 2026

Punjab Education Modelएक समय था जब पंजाब के सरकारी स्कूलों की स्थिति देश के सबसे कमजोर शैक्षिक ढांचों में गिनी जाती थी। 2016-17 में शिक्षा के क्षेत्र में राज्य का स्थान 22वां था, जो धीरे-धीरे गिरते हुए 2018-19 में 26वें और 2020 में 27वें स्थान तक पहुंच गया। उस दौर में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों के सामने संसाधनों की कमी, कमजोर बुनियादी ढांचा और सीमित अवसर बड़ी चुनौती थे। कई परिवारों के मन में यह चिंता थी कि उनके बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा। 


लेकिन पिछले कुछ वर्षों में स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। 2022 में सत्ता परिवर्तन के बाद शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई नीतियों और प्राथमिकताओं पर जोर दिया गया। परिणामस्वरूप, NITI Aayog की शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026 के अनुसार पंजाब ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में देशभर में पहला स्थान हासिल कर लिया है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पंजाब ने केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।

Punjab Education Model: सीखने के स्तर में बड़ा सुधार, बच्चों का प्रदर्शन मजबूत 

NITI Aayog Reportरिपोर्ट के अनुसार पंजाब के सरकारी स्कूलों में छात्रों के सीखने के स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। तीसरी कक्षा के भाषा कौशल में राज्य के बच्चों ने 82 प्रतिशत दक्षता हासिल की, जबकि केरल 75 प्रतिशत पर रहा। गणित में भी पंजाब ने 78 प्रतिशत प्रदर्शन किया, जबकि केरल 70 प्रतिशत पर था। 

नौवीं कक्षा के गणित में भी पंजाब आगे रहा, जहां 52 प्रतिशत परिणाम दर्ज किए गए, जबकि केरल का प्रदर्शन 45 प्रतिशत रहा। ये आंकड़े इस बात का संकेत देते हैं कि अब पंजाब के सरकारी स्कूलों में बच्चों की बुनियादी शिक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत हो रही है और सीखने की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है।

बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव: स्मार्ट क्लास से इंटरनेट तक पहुंच

शिक्षा सुधार केवल परिणामों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि Punjab Education Model के तहत स्कूलों के Infrastructure में भी व्यापक बदलाव किए गए हैं। आज पंजाब के 99.9 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में बिजली की सुविधा उपलब्ध है। लगभग 99 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर चालू स्थिति में हैं और 80 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम बनाए जा चुके हैं।

स्मार्ट क्लासरूम की उपलब्धता के मामले में पंजाब का आंकड़ा 80.1 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि हरियाणा जैसे राज्यों में यह लगभग 50.3 प्रतिशत है। इंटरनेट सुविधा के क्षेत्र में भी पंजाब 88.9 प्रतिशत के स्तर पर है, जो हरियाणा के 78.9 प्रतिशत से काफी आगे है। यह बदलाव केवल तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति बदली हुई सोच को दर्शाता है।

सरकारी स्कूलों में बढ़ता भरोसा और नए अवसर 

Bhagwant Mann Governmentपंजाब सरकार के अनुसार शिक्षा सुधार को मिशन मोड में लागू किया गया है। मुख्यमंत्री Bhagwant Maan के नेतृत्व में सरकारी स्कूलों को केवल प्रशासनिक संस्थान नहीं, बल्कि भविष्य निर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया। इसी दिशा में शिक्षकों को Finland और Singapore जैसे देशों में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया, ताकि Global Education Model को राज्य में अपनाया जा सके।

इसके परिणाम भी दिखाई देने लगे हैं। सरकारी स्कूलों के 786 छात्रों ने JEE मेन जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं पास की हैं, जबकि 1284 छात्रों ने Neet Exam में सफलता हासिल की है। यह इस बात का प्रमाण है कि अवसर मिलने पर सरकारी स्कूलों के बच्चे भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।

शिक्षकों की भर्ती और नए शिक्षा मॉडल का विस्तार

राज्य सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 13 हजार से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों की भर्ती की है। इसके अलावा लगभग 3 लाख छात्रों के लिए English Age कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिससे बच्चों को वैश्विक स्तर की भाषा दक्षता मिल सके। राज्य में 118 “School of Eminence” स्थापित किए गए हैं, जिन्हें आधुनिक शिक्षा का मॉडल माना जा रहा है।

इन स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लैब और आधुनिक शिक्षण तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के बच्चों को समान अवसर और समान गुणवत्ता वाली शिक्षा मिल सके।

गांवों में बदली सोच, सरकारी स्कूल बने गर्व का विषय

पंजाब के गांवों में अब Punjab Education Model के चलते सरकारी स्कूलों को लेकर लोगों की धारणा बदल गई है। पहले जहां सरकारी स्कूलों को एक विकल्प के रूप में देखा जाता था, वहीं अब कई परिवार गर्व से कहते हैं कि उनके बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। यह बदलाव केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि समाज की सोच का भी है।

सरकारी स्कूलों में हो रहे सुधार, बेहतर परिणाम, आधुनिक सुविधाएं और छात्रों की उपलब्धियां इस बात का संकेत हैं कि शिक्षा व्यवस्था अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। यह बदलाव किसी प्रचार या नारे का परिणाम नहीं, बल्कि लगातार किए गए सुधारों और नीतिगत बदलावों का असर है।

एक नई दिशा की ओर बढ़ता पंजाब

पंजाब की शिक्षा यात्रा इस बात का उदाहरण बन चुकी है कि यदि सरकार प्राथमिकता तय कर ले तो सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव संभव हैं। कभी पिछड़ा माना जाने वाला यह राज्य आज शिक्षा के क्षेत्र में देश में अग्रणी बनकर उभरा है। यह कहानी सिर्फ रैंकिंग बदलने की नहीं, बल्कि लाखों बच्चों के भविष्य बदलने की कहानी है।

Read This Also:- Rahul Gandhi ने CBSE पर उठाए सवाल, छात्रों से की बातचीत