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Delhi Digital Ration: CBDC से रुकेगी राशन की चोरी और कालाबाजारी

 27 May 2026

Delhi Digital Rationदेश की राजधानी Delhi में सरकारी राशन व्यवस्था को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए एक बड़ा Digital कदम उठाया जा रहा है। राशन की चोरी, जमाखोरी और कालाबाजारी जैसी समस्याओं से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने Reserve Bank of India (RBI) के साथ मिलकर Central Bank Digital Currency यानी CBDC आधारित सिस्टम लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों को नकद या पारंपरिक Subsidy की जगह सीधे Digital Currency दी जाएगी, जिसका इस्तेमाल केवल सरकारी राशन खरीदने के लिए ही किया जा सकेगा।


Delhi Digital Ration: क्या है CBDC और क्यों है खास

CBDC Ration SystemCBDC यानी Central Bank Digital Currency, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी की जाने वाली डिजिटल मुद्रा है। इसकी वैल्यू पूरी तरह भारतीय रुपये के बराबर होगी, लेकिन इसका उपयोग सीमित दायरे में किया जाएगा। Delhi सरकार की योजना के मुताबिक इस Digital Currency का इस्तेमाल केवल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की दुकानों पर राशन लेने के लिए ही संभव होगा।

सरकार का मानना है कि इससे राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और बीच में होने वाली गड़बड़ियों पर रोक लगेगी। अभी तक कई बार शिकायतें सामने आती रही हैं कि गरीबों के हिस्से का राशन बाजार में बेचा जा रहा है या फर्जी तरीके से उठाया जा रहा है। CBDC आधारित मॉडल ऐसे मामलों पर सीधे नियंत्रण लगाने की कोशिश माना जा रहा है।

राशनकार्ड धारकों को कैसे मिलेगा फायदा

नई व्यवस्था के तहत हर राशन कार्ड धारक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से एक डिजिटल वॉलेट जोड़ा जाएगा। सरकार लाभार्थी की पात्रता के हिसाब से उसी वॉलेट में डिजिटल करेंसी ट्रांसफर करेगी। उदाहरण के तौर पर किसी परिवार को जितने गेहूं या चावल का अधिकार है, उसकी कीमत के बराबर CBDC उनके वॉलेट में भेज दी जाएगी।

इसके बाद लाभार्थी Delhi Digital Ration प्रणाली के तहत किसी भी अधिकृत PDS दुकान पर जाकर राशन प्राप्त कर सकेगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सरकारी सहायता सीधे सही व्यक्ति तक पहुंचे और उसका उपयोग केवल राशन के लिए ही हो।

ऐसे होगा राशन का भुगतान 

सरकारी राशन की दुकान पर पहुंचने के बाद उपभोक्ता का सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन पूरा होने के बाद लाभार्थी POS मशीन पर QR Code Scan करके या OTP के जरिए भुगतान कर सकेगा। OTP लाभार्थी के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा। जैसे ही प्रक्रिया पूरी होगी, राशन की कीमत उतनी ही राशि के रूप में उपभोक्ता के CBDC वॉलेट से कट जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में नकद लेनदेन की जरूरत नहीं होगी, जिससे भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की संभावना भी कम हो जाएगी।

DBT सिस्टम से कैसे अलग है यह मॉडल 

Digital Food Distributionअब तक सरकार DBT यानी Direct Benefit Transfer के जरिए सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजती रही है। लेकिन उस राशि का उपयोग व्यक्ति किसी भी काम में कर सकता था। कई बार जरूरतमंद परिवार राशन की बजाय दूसरी जरूरतों में वह पैसा खर्च कर देते थे।

CBDC मॉडल इसी व्यवस्था से अलग है। इसमें मिलने वाली डिजिटल करेंसी केवल राशन खरीदने के लिए ही इस्तेमाल की जा सकेगी। न तो इसे बैंक खाते में ट्रांसफर किया जा सकेगा और न ही किसी दूसरी खरीदारी में उपयोग किया जा सकेगा। सरकार का दावा है कि इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली अधिक प्रभावी बनेगी और सब्सिडी का दुरुपयोग रुकेगा।

दिल्ली में कितने लोग होंगे शामिल

दिल्ली सरकार के आंकड़ों के अनुसार राजधानी में करीब 15.46 लाख राशन कार्ड जारी किए गए हैं। Delhi Digital Ration व्यवस्था के जरिए लगभग 64.93 लाख लाभार्थियों तक सरकारी राशन पहुंचता है। इसके लिए दिल्ली में 1943 राशन वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।

सरकार की योजना है कि आने वाले समय में इन सभी केंद्रों पर CBDC आधारित भुगतान प्रणाली लागू कर दी जाए। शुरुआत में यह व्यवस्था Free Ration Scheme के तहत मिलने वाले गेहूं और चावल के लिए लागू होगी। बाद में चीनी जैसी अन्य आवश्यक वस्तुओं को भी इसी डिजिटल सिस्टम के जरिए वितरित करने की तैयारी है।

कालाबाजारी पर कैसे लगेगी रोक

सरकार का मानना है कि यह Digital Model Ration माफियाओं और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई साबित होगा। क्योंकि Digital Currency केवल अधिकृत राशन दुकानों पर ही उपयोग हो सकेगी, इसलिए बीच में राशन बेचने या फर्जी तरीके से उठाने की संभावना काफी कम हो जाएगी।

इसके अलावा हर ट्रांजैक्शन का डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद रहेगा, जिससे निगरानी करना आसान होगा। अधिकारियों को यह पता चल सकेगा कि किस लाभार्थी ने कब और कितना राशन लिया। इससे फर्जी लाभार्थियों और भ्रष्ट नेटवर्क पर भी नियंत्रण संभव होगा।

भविष्य की राशन व्यवस्था की ओर बड़ा कदम

दिल्ली सरकार और RBI का यह संयुक्त प्रयोग देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को डिजिटल बनाने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है। यदि यह मॉडल सफल रहता है तो आने वाले समय में दूसरे राज्यों में भी इसे लागू किया जा सकता है। Digital India और Cashless Economy की दिशा में यह कदम केवल तकनीकी बदलाव नहीं बल्कि गरीबों तक सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से पहुंचाने की कोशिश भी माना जा रहा है।

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