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Vande Mataram Mandatory: बंगाल के स्कूलों को लेकर फैसला

 15 May 2026

Vande Mataram Mandatory: पश्चिम बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने के बाद राज्य में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। ताज़ा आदेश में स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे सुबह की असेंबली के दौरान वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य रूप से करवाएं। इस कदम का उद्देश्य छात्रों में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ाना बताया गया है।


शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल प्रमुखों को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि कक्षाएं शुरू होने से पहले सुबह की सभा की प्रार्थना के दौरान ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य होगा। साथ ही, आदेश में कहा गया है कि इसका पालन तत्काल प्रभाव से किया जाना चाहिए ताकि राज्य के सभी स्कूलों में सभी छात्र इसे गाएं।

राष्ट्रगीत और राज्य गीत का नया परिदृश्य

Vande Mataram Mandatoryपश्चिम बंगाल के स्कूलों में पारंपरिक रूप से सुबह की असेंबली में केवल राष्ट्रगीत ‘जन गण मन’ ही गाया जाता था, जिसे रवींद्रनाथ टैगोर ने लिखा था। इसके अलावा, पिछली TMC सरकार ने राज्य गीत ‘बांग्लार माटी, बांग्लार जल’ को भी शामिल किया था। यह गीत भी टैगोर द्वारा 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में रचित था, और अब इसे सुबह की असेंबली में वंदे मातरम अनिवार्य भी कर दिया गया है।

अब नए आदेश के बाद छात्रों को तीन गीत, राष्ट्रगीत, राज्य गीत और वंदे मातरम, गाने होंगे। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की कालजयी रचना ‘वंदे मातरम’ अब स्कूल असेंबली का हिस्सा बन गई है।

आदेश का कानूनी आधार

Suvendu Adhikari Demandइस आदेश के पीछे केंद्रीय सरकार द्वारा उठाए गए कदम भी हैं। हाल ही में ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) में संशोधन का प्रस्ताव आया था। इसके अनुसार ‘वंदे मातरम’ के गायन में बाधा डालना दंडनीय अपराध माना जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जनवरी में भी एक नोटिस जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इसे स्कूलों में गाया जाना चाहिए। अब पश्चिम बंगाल सरकार ने इसे राज्य स्तर पर लागू कर दिया है।

स्कूल प्रमुखों में असमंजस 

Vande Mataram Mandatory: हालांकि आदेश जारी हो चुका है, लेकिन स्कूलों में इसे लागू करना आसान नहीं माना जा रहा। कई स्कूल प्रमुखों ने कहा कि सुबह की असेंबली में तीनों गीतों को शामिल करना समय-सारणी में कठिनाई पैदा करेगा, बावजूद इसके अब वंदे मातरम अनिवार्य कर दिया गया है।

एक स्कूल प्रमुख ने बताया, हम राष्ट्रगीत को छोड़ नहीं सकते, क्योंकि यह अनिवार्य है। अगर वंदे मातरम पहले गाया जाएगा और राज्य गीत भी शामिल किया जाएगा, तो कक्षा शुरू होने में देरी हो सकती है। नोटिस में राज्य गीत के बारे में कोई निर्देश नहीं है, फिर भी छात्रों को तीन गीतों के लिए एक साथ रोकना आसान नहीं होगा।

स्कूल शिक्षा विभाग ने कहा है कि असेंबली के दौरान गीत गाने की प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए। इस रिकॉर्डिंग में वीडियो रिकॉर्डिंग भी शामिल हो सकती है, ताकि कार्यान्वयन के प्रमाण के रूप में इसका उपयोग किया जा सके।

छात्रों में राष्ट्रीय भावना को बढ़ावा 

West Bengal BJPसरकारी अधिकारी का कहना है कि यह कदम छात्रों में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। ‘वंदे मातरम’ का गायन केवल एक सांस्कृतिक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह देशभक्ति की भावना को भी उजागर करता है।

साथ ही, शिक्षा विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि राज्य के सभी स्कूलों में एकसमान रूप से यह प्रथा अपनाई जाए। इसका उद्देश्य यह भी है कि छात्र रोजाना राष्ट्रीय और राज्य गीतों के माध्यम से अपने इतिहास और संस्कृति के प्रति जागरूक रहें।

पश्चिम बंगाल में BJP सरकार के सत्ता में आने के बाद यह पहला बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसमें शिक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बदलाव किया गया है। अब स्कूलों में सुबह की असेंबली का प्रारूप बदल गया है और छात्रों को तीन प्रमुख गीत- राष्ट्रगीत, राज्य गीत और वंदे मातरम, गाना अनिवार्य होगा। 

हालांकि, इसे लागू करने में स्कूल प्रमुखों को समय प्रबंधन और छात्र सहभागिता के मुद्दों का सामना करना पड़ सकता है। फिर भी राज्य सरकार इस आदेश के सख्त पालन पर जोर दे रही है।

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