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BRICS Foreign Ministers: बैठक में रणनीति पर करेंगे चर्चा
14 May 2026
BRICS Foreign Ministers: नई दिल्ली में आज से ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक शुरू हो गई है। इस बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर कर रहे हैं। बैठक में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, ईरान के विदेश मंत्री होसैन अरागची सहित कई देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधि शामिल हैं, जहां ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्री वैश्विक मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।
बैठक का आयोजन इस साल सितंबर में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले किया गया है। इसका उद्देश्य बड़े शिखर सम्मेलन के एजेंडा को अंतिम रूप देना और सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करना है। बैठक का मुख्य फोकस नवाचार, स्वास्थ्य, सतत विकास और वैश्विक संकटों पर सामूहिक रणनीति बनाने पर रहेगा।
बैठक 14 और 15 मई को भारत मंडपम में आयोजित हो रही है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गुरुवार दोपहर 1 बजे एक संयुक्त कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए इस बैठक से जुड़ेंगे। बैठक पूरे दिन चलने की संभावना है और इसका समापन शाम 7 बजे रात्रिभोज के साथ होगा।
ब्रिक्स की बैठक का एजेंडा
BRICS Foreign Ministers: विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा स्वास्थ्य और विकास क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है। बैठक में संक्रामक और गैर-संक्रामक बीमारियों से निपटने के उपायों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर इसके प्रभाव को लेकर भी बातचीत होगी, जहां ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्री इन अहम वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
विशेष रूप से, ईरान में जारी युद्ध पर चर्चा इस बैठक का केंद्र बिंदु बन सकता है। ईरान के विदेश मंत्री अरागची भी इस बैठक में हिस्सा ले रहे हैं और अलग से एस. जयशंकर और अन्य देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे।
रक्षा मामलों के विशेषज्ञ राफेल लॉस के अनुसार, यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान युद्ध का असर न केवल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर बल्कि अमेरिका-चीन संबंधों पर भी पड़ सकता है।
बीजिंग में ट्रंप-जिनपिंग की द्विपक्षीय मुलाकात
Xi Jinping Trump: इसी बीच, बीजिंग में भी वैश्विक राजनीति के महत्वपूर्ण घटनाक्रम चल रहे हैं। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नौ साल बाद चीन की यात्रा पर आए हैं। इस दौरान उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बैठक की।
दोनों नेताओं की यह बैठक वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक संतुलन के लिहाज से अहम मानी जा रही है। 2017 के बाद यह ट्रंप की चीन यात्रा की पहली मुलाकात है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-चीन और ईरान के मुद्दे पर दुनिया के बड़े निर्णय आने वाले समय में इन बैठकों से प्रभावित होंगे।
ब्रिक्स और वैश्विक राजनीति में उसकी भूमिका
ब्रिक्स संगठन की स्थापना 2009 में हुई थी। इसके सदस्य देश ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका हैं। संगठन का उद्देश्य दुनिया के विकासशील देशों को एक मंच पर लाकर उनके साझा हितों को बढ़ावा देना है।
ब्रिक्स समूह दुनिया की लगभग 49.5% जनसंख्या और वैश्विक GDP के करीब 40% हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। इसके पहले सम्मेलन का आयोजन रूस के येकातेरिनबर्ग में हुआ था।
सदस्यों की संख्या समय के साथ बढ़ती रही है। दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने से पहले समूह का नाम BRIC था। अब इसमें ईरान, इजिप्ट, इथियोपिया, सऊदी अरब और यूएई 2024 में और इंडोनेशिया 2025 में शामिल हुआ।
भारत इस समय ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता कर रहा है। इस बैठक के जरिए भारत वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक क्षमताओं को प्रदर्शित करने के साथ-साथ अमेरिका और ईरान दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
ईरान युद्ध और भारत की रणनीति
BRICS Foreign Ministers: ईरान में युद्ध को अब तक 76 दिन हो चुके हैं। इस संघर्ष को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर कई प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कोई निर्णायक हल अभी तक नहीं निकला है। भारत के लिए यह सिर्फ अपने जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने का मामला नहीं है, और इस मुद्दे पर भी ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्री चर्चा में शामिल हैं।
चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट के लिए यह संघर्ष सीधे असर डालता है। चाबहार बंदरगाह भारत के लिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए एक रणनीतिक व्यापार मार्ग है। इस बैठक में लिए जाने वाले फैसले न केवल भारत के आर्थिक हितों, बल्कि वैश्विक शांति और सुरक्षा पर भी प्रभाव डाल सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय
New Delhi Meeting: विशेषज्ञ मानते हैं कि ब्रिक्स समूह आगे चलकर दुनिया के बड़े झगड़े सुलझाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का हल ढूंढने और वैश्विक शांति बनाए रखने में यह मंच रणनीतिक महत्व रखता है।
इस प्रकार, नई दिल्ली और बीजिंग में चल रही ये दो बैठकें वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक साबित हो सकती हैं।
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