PM Modi criticism: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (10 मई) को हैदराबाद में भाजपा की तेलंगाना इकाई की रैली में देशवासियों से विशेष अपील की। पीएम मोदी ने कहा कि अगले एक साल तक लोग सोना न खरीदें, विदेश यात्रा कम करें और पेट्रोल तथा गैस का इस्तेमाल सोच-समझकर करें। उन्होंने कोरोना काल में अपनाई गई वर्क-फ्रॉम-होम और ऑनलाइन मीटिंग जैसी व्यवस्थाओं को दोबारा प्राथमिकता देने की भी सलाह दी। उनका मकसद खाड़ी देशों में तनाव और ग्लोबल ऊर्जा संकट के प्रभाव को देखते हुए देश में बचत और संयम को बढ़ावा देना था, लेकिन विपक्ष ने इस अपील पर पीएम मोदी की आलोचना की।
खरगे ने पीएम की अपील पर साधा निशाना
PM Modi criticism: इस अपील के तुरंत बाद सियासत गरमाई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब देश में लोगों की आर्थिक हालत इतनी खराब है कि गरीबी में आटा गीला हो रहा है, तो प्रधानमंत्री जनता को बचत का पाठ क्यों पढ़ा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार में व्यस्त थे, रोडशो कर रहे थे और चुनावों के दौरान स्थिति को सामान्य बता रहे थे, जिस पर विपक्ष ने पीएम मोदी की आलोचना की।
खरगे ने कहा, प्रधानमंत्री अपनी 12 वर्षों की नाकामी का ठीकरा जनता पर न फोड़ें। अब जब चुनाव खत्म हो गए हैं, तभी देश को यह उपदेश दिया जा रहा है कि यह मत करें, वह मत खरीदें, पेट्रोल-बचत करें और वर्क-फ्रॉम-होम अपनाएं।
कांग्रेस का आरोप: पहले चेतावनी, अब सलाह
PM Modi criticism: खरगे ने ट्वीट में आगे कहा कि जब 28 फ़रवरी को पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू हुआ, कांग्रेस पार्टी ने पहले ही अर्थव्यवस्था की स्थिति और जरूरतों पर प्रकाश डाला था। उन्होंने कहा कि उस समय पार्टी ने बढ़ते पेट्रोल-डीजल और एलपीजी के दाम, रुपये की गिरती कीमत, किसानों के लिए उर्वरक की कमी, खाद्य सुरक्षा पर खतरे, दवाइयों की बढ़ती कीमत और एमएसएमई क्षेत्र के संकट समेत कई आर्थिक पहलुओं को हाईलाइट किया, जिस पर विपक्ष ने पीएम मोदी की आलोचना की।
खरगे ने लिखा: जब ग़रीबी में आटा गीला हो रहा है तब मोदी जी देश को बचत करने का पाठ पढ़ा रहे हैं। 28 फ़रवरी को West Asia में जंग शुरू हुई थी, कांग्रेस ने हर पहलू को हाइलाइट किया — अर्थव्यवस्था की बर्बादी, रुपये का लगातार गिरना, पेट्रोल-डीज़ल-LPG के दाम और क़िल्लत, किसानों के लिए Fertiliser की कमी, Food Security पर खतरा, दवाइयों के दाम, MSMEs का संकट और बहुत कुछ।
चुनाव खत्म, अब बचत का पाठ
Economic woes India: खरगे ने आगे कहा कि पीएम मोदी चुनाव प्रचार में व्यस्त थे और स्थिति को सामान्य बताकर जनता को आश्वस्त कर रहे थे। उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री क्यों चुनावी प्रचार में मशगूल थे और अब जब चुनाव खत्म हो गए हैं, तभी देश को बचत के लिए सुझाव दे रहे हैं।
खरगे ने स्वामी तुलसीराम के हवाले से कहा कि पर उपदेश कुशल बहुतेरे यानी सलाह देने में तो बहुत से माहिर होते हैं। उनके अनुसार, यह समय जनता को आर्थिक सुधार की व्यावहारिक नीतियों और राहत देने के उपायों की जरूरत है, सिर्फ बचत का उपदेश देने का नहीं।
पीएम की अपील का मकसद
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी अपील में कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट और खाड़ी देशों में तनाव के कारण पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए, लोगों को संयमित तरीके से इन संसाधनों का उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि वर्क-फ्रॉम-होम और वीडियो कॉन्फ्रेंस जैसी व्यवस्थाओं को अपनाकर ऊर्जा की बचत की जा सकती है। पीएम मोदी का उद्देश्य देश में जिम्मेदार खर्च और संसाधनों की सुरक्षा को बढ़ावा देना था।
सियासत गरम, विपक्ष ने किया हमला
Congress BJP clash: कांग्रेस के अलावा अन्य विपक्षी दलों ने भी पीएम मोदी की अपील को चुनावी राजनीति से जोड़कर आलोचना की। उनका कहना है कि आर्थिक अस्थिरता और महंगाई की स्थिति में केवल उपदेश देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। विपक्ष ने यह भी तर्क दिया कि जनता को राहत देने वाली योजनाओं और समर्थन नीतियों की जरूरत है, सिर्फ संयम बरतने की सलाह से काम नहीं चलेगा।
देश में बढ़ती महंगाई और आर्थिक चुनौतियों के बीच प्रधानमंत्री की बचत और संयम की अपील पर सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने इसे जनता के लिए असंगत और चुनावी परिणामों के बाद दिया गया उपदेश बताया। वहीं, पीएम मोदी ने वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा संकट को देखते हुए संयम बरतने और संसाधनों की बचत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।