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दिल्ली के 60 लाख लोगों को दिखाया जा रहा है बुलडोज़र का डर!

 17 May 2022

दिल्ली के लगभग 60 लाख लोग आज एक कॉमन डर को जी रहे हैं। ये डर है - बुलडोज़र का डर। MCD का डिमोलिशन ड्राइव चर्चा के केंद्र में है। आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि 63 लाख लोगों का घर उजड़ने नहीं देंगे। विधायकों को जेल भी जाना पड़े तो जाएँ, लेकिन इस ड्राइव के ख़िलाफ़ खड़े हों। ग़ौरतलब है कि शाहीन बाग़ में ऐसे ही एक ड्राइव की मुख़ालफ़त करने पर अमानतुल्लाह ख़ान गिरफ्तार हो चुके हैं।

 

MCD में क़ाबिज़ बीजेपी की तरफ़ से कुछ सवाल उठते हैं -

  • अवैध क़ब्ज़ा है तो रियायत कैसी?
  • अगर आज अवैध क़ब्ज़ों को तोड़ा नहीं गया तो समस्या सुलझेगी कैसे?
  • अनाधिकृत कॉलोनियों के लिए इतनी संवेदना क्यों?

 

इन सवालों का जवाब ढ़ूँढ़ने के लिए पहले ये समझना होगा कि अनाधिकृत कॉलोनी अस्तित्व में आती कैसे है और आज दिल्ली में इसका आकार कितना बड़ा है?

 

कैसे बनी अनाधिकृत कॉलोनी

दिल्ली एक प्लान्ड शहर नहीं है। आज़ादी के बाद से ही भारत विभाजन, अन्य जगहों पर रोज़गार की सीमित संभावनाओं के कारण लोग यहाँ आते रहे और बसते चले गए।

 

शहर में अफॉर्डेबल हाउसिंग का कोई प्लान नहीं था। क़ीमतें ज़्यादा थीं। सो जिन लोगों के पास ज़मीनें थीं उन्होंने अपनी ज़मीनों के टुकड़े बेचे। लोगों ने घर बना लिए।

देश के सामने अन्य बड़ी समस्याएँ थीं, सो इस तरफ़ किसी का ध्यान नहीं दिया गया। कालांतर में पलायन बढ़ता गया। दिल्ली में लोगों की संख्या बढ़ती रही और अनाधिकृत कॉलोनी का आकार बड़ा होता चला गया।

 

क्या कहते हैं आँकड़े

दिल्ली की जनसंख्या का लगभग 30 फ़ीसदी हिस्सा अनाधिकृत कॉलोनी में रहता है।

दिल्ली में लगभग 1700 कॉलोनी अवैध या अनाधिकृत हैं।

कई अवैध कॉलोनी के लोग आधारभूत सुविधाओं को भी तरसते हैं। तो वहीं कई कॉलोनी ऐसी भी हैं जो अवैध हैं लेकिन विकसित जैसी हैं। जैसे सैनिक फ़ार्म्स, फ़्रीडम फाइटर कॉलोनी आदि।

 

क्या होना चाहिए

होना तो ये चाहिए कि अनाधिकृत का टैग हटे। बस्तियाँ अधिकृत हों। मगर प्रक्रिया कुछ ऐसी हो जिससे किसी को ठेस न पहुँचे। अवैध कॉलोनी में रहने वाले अधिकतर लोग मजबूर हैं। क़ब्ज़ा गुण्डे करते हैं, मजबूर नहीं। सो, शासन और प्रशासन को चाहिए कि लोगों को बसाने की नीयत से कार्रवाई करे, उजाड़ने की नीयत से नहीं।

 

लगभग 6 साल पहले 2016 में कठपुतली कॉलोनी को तोड़ा गया। बाशिंदों से वादा किया गया कि 2 सालों में उनकी पुनर्स्थापना हो जाएगी। लेकिन वो लोग आज भी पश्चिमी दिल्ली के ट्रांजिट कैंप में रह रहे हैं। लगभग 2800 परिवार ट्रांजिट कैंप में हैं, उनके अवैध घरों को तोड़ने के बाद शासन ने उनसे वादा किया उनकी पुनर्स्थापना का लेकिन वादा हक़ीक़त नहीं बना।

 

MCD की नीयत क्या है?

ऐसे में सवाल उठते हैं कि आख़िर किस दम पर MCD लगभग अवैध कॉलोनी को तोड़ने की बात कर रही है। नीयत बसाने की है या उजाड़ने की।

 

या फिर केवल डराने की ताकि आगामी लोकसभा चुनावों के लिए हिंदू-मुस्लिम का नैरेटिव सेट किया जा सके। क्योंकि अलग अलग चैनल्स पर बीजेपी के तमाम प्रवक्ता बात करते हैं रोहिंग्या की, बांग्लादेशियों की।

 

ख़ैर दिल्ली के लोगों के लिए ये राहत भरी बात है कि इस मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री लोगों के साथ दिख रहे हैं और पूरी दमख़म के साथ अपनी बात रख रहे हैं।