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Thalapathy Vijay-Congress: राजनीति में कभी जुड़ने की इच्छा

 09 May 2026

Thalapathy Vijay-Congress: तमिलनाडु के आगामी मुख्यमंत्री बनने की रेस में शामिल सुपरस्टार थलापति विजय की राजनीतिक यात्रा उतनी सीधी नहीं रही जितनी आज दिखाई देती है। क्या आप जानते हैं कि साल 2009 में थलापति विजय कांग्रेस पार्टी में शामिल होना चाहते थे? उस समय वह अपने राजनीतिक सपनों को लेकर दिल्ली तक गए थे, लेकिन वहां उन्हें एक अहम सुझाव मिला जिसने उनकी किस्मत बदल दी। 


हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उस वक्त विजय केवल कांग्रेस के सदस्य बनना चाहते थे। उन्हें टिकट या कोई राजनीतिक पद नहीं चाहिए था। उनके साथ उनके पिता एस.ए. चंद्रशेखर और कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव गोपीनाथ पलानियप्पन भी मौजूद थे। उनका मकसद साफ था: पार्टी की विचारधारा में शामिल होकर राजनीति की दुनिया में कदम रखना।

राहुल गांधी का सुझाव और विजय का फैसला

Thalapathy Vijay-Congress: दिल्ली में उस समय कांग्रेस महासचिव रहे राहुल गांधी ने विजय से मुलाकात की। रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी ने सुझाव दिया कि थलापति विजय पहले यूथ कांग्रेस का चुनाव लड़ें और खुद को पार्टी में साबित करें। इस सुझाव ने विजय की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को प्रभावित किया।

हालांकि विजय उस वक्त अपनी 50वीं फिल्म पूरी करने ही वाले थे और अपने करियर में बेहद कामयाब थे, लेकिन उन्होंने राजनीति के प्रति अपनी ख्वाहिश को फिलहाल टाल दिया। वह चेन्नई लौट गए और फिल्मों पर ध्यान केंद्रित किया।

कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उस समय कांग्रेस की सहयोगी पार्टी डीएमके ने भी विजय के शामिल होने का विरोध किया था। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि राहुल गांधी का यह फैसला विजय के लिए सही साबित हुआ।

विजय की राजनीतिक भूमिका आज 

Thalapathy Vijay-Congress: आज, लगभग 17 साल बाद, थलापति विजय ने अपने राजनीतिक सपनों को पूरी तरह से आकार दे दिया है। उन्होंने अपनी पार्टी, टीवीके (थलापति विजय कोंग्रेस), बनाई और चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में थलापति विजय की पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।

वर्तमान स्थिति यह है कि टीवीके के पास 108 विधायक हैं। हालांकि बहुमत के लिए 117 सीटों की आवश्यकता है, उन्होंने गठबंधन कर 116 सीटों तक पहुंच बनाई। ऐसे में राज्य में सरकार गठन को लेकर सस्पेंस बरकरार है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विजय उस समय कांग्रेस में शामिल हो जाते, तो शायद आज उनकी पार्टी इतनी बड़ी ताकत नहीं बन पाती। कांग्रेस के साथ होने पर उनका व्यक्तिगत राजनीतिक वजूद कहीं खो सकता था।

कांग्रेस में शामिल होने का असली मकसद 

Rahul Gandhi Meeting: विजय ने कभी यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल पार्टी का सदस्य बनना था। वह टिकट या किसी पद की तलाश में नहीं थे। उनके पिता कांग्रेस विचारधारा के प्रति काफी प्रेरित थे और उन्होंने विजय के फैसले में भूमिका निभाई।

लेकिन राहुल गांधी की उस 'एक ना' ने विजय की राह बदल दी। आज, विजय न केवल तमिलनाडु में सबसे बड़ी पार्टी के नेता हैं, बल्कि मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में भी शामिल हैं। उनके पास अपनी पार्टी का पूरा नियंत्रण है, और वे अपने राजनीतिक निर्णय खुद ले रहे हैं।

एक फैसले ने बदल दी किस्मत 

Tamil Nadu Politics: 2009 में विजय की कांग्रेस ज्वाइन करने की इच्छा और राहुल गांधी की सलाह के बाद उनकी राजनीति की दिशा पूरी तरह बदल गई। यदि उस समय विजय कांग्रेस के साथ जुड़े होते, तो आज की तस्वीर बिलकुल अलग होती। वे किसी बड़े पार्टी ढांचे में फंस सकते थे, जबकि अब उन्होंने अपने नाम और अपने व्यक्तित्व के दम पर राजनीति में मजबूत पहचान बनाई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विजय के लिए यह फैसला उनके करियर और राजनीति दोनों के लिहाज से फायदे का साबित हुआ। उनके पास आज अपनी पार्टी है, अपनी पहचान है और तमिलनाडु की राजनीति में उनका वजूद सबसे मजबूत है।

थलापति विजय की 2009 की कहानी एक ऐसा मोड़ है जिसने तमिलनाडु की राजनीति का नक्शा ही बदल दिया। कांग्रेस में शामिल होने की ख्वाहिश, राहुल गांधी की सलाह, और फिर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को टालना, इन सब घटनाओं ने उन्हें आज अपनी पार्टी का नेतृत्व करने और राज्य में सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनने का मौका दिया।

सालों बाद यह साबित हो गया कि कभी-कभी सही समय पर लिए गए फैसले ही किसी व्यक्ति की पूरी किस्मत बदल सकते हैं। थलापति विजय का यह राजनीतिक सफर, उनकी फिल्मों की तरह ही प्रेरणादायक और रोमांचक है।