BJP Bengal schemes: पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के साथ ही केंद्र सरकार ने राज्य में रुकी परियोजनाओं और केंद्रीय योजनाओं को तेजी से लागू करने का काम शुरू कर दिया है। लंबे समय से केंद्र और राज्य के बीच टकराव के कारण कई महत्वपूर्ण योजनाएँ और परियोजनाएँ ठहर गई थीं। अब केंद्रीय मंत्रियों से इन परियोजनाओं और योजनाओं की पूरी सूची जुटाई जा रही है ताकि रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके। इस प्रयास के तहत राज्य में बीजेपी की बंगाल की योजनाएँ भी प्रभावी ढंग से लागू की जाएंगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट की बैठक में स्पष्ट कहा कि पश्चिम बंगाल को विकास की नई दिशा देने की जरूरत है। इसके बाद केंद्र सरकार ने हर मंत्रालय से उन योजनाओं और परियोजनाओं की लिस्ट मांगी जो पिछले 12 साल में राज्य और केंद्र के बीच मतभेद की वजह से रुकी हुई थीं।
राजनाथ सिंह को मिला समन्वय का जिम्मा
BJP Bengal schemes: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को केंद्र ने सभी मंत्रालयों से समन्वय स्थापित करने और जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने प्रत्येक केंद्रीय मंत्री से संपर्क किया और उनकी मंत्रालय से जुड़ी अटकी परियोजनाओं की सूची मांगी। मंत्रालयों ने धीरे-धीरे आवश्यक विवरण केंद्र को भेजना शुरू कर दिया है। इस पूरी प्रक्रिया के तहत बीजेपी की बंगाल की योजनाएँ भी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाई जाएंगी।
सभी मंत्रालयों से जानकारी मिलने के बाद केंद्र सरकार इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट रूप से कदम उठाएगी। मोदी सरकार ने हमेशा ही पश्चिम बंगाल में अटकी योजनाओं को लागू करने में सहयोग की आवश्यकता को महत्व दिया है।
क्यों रुकी थीं परियोजनाएँ
BJP Bengal schemes: पिछले वर्षों में ममता बनर्जी की राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच कई बार टकराव हुआ। कई केंद्रीय योजनाओं को लागू ही नहीं किया गया या लागू होने पर भी उनमें बदलाव कर दिया गया। उदाहरण के तौर पर, कई परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई या अन्य तकनीकी और प्रशासनिक बाधाएँ बनाई गईं।अब इन अड़चनों को दूर कर बीजेपी की बंगाल की योजनाएँ प्रभावी रूप से लागू की जाएँगी।
बॉर्डर फेंसिंग का मामला सबसे बड़ा उदाहरण है। ममता सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों में फेंसिंग के लिए जरूरी जमीन नहीं दी, जिससे केंद्र सरकार की योजना पर रोक लग गई। इसके अलावा, अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं जैसे स्वास्थ्य, आवास, शिक्षा और जल-संरक्षण से जुड़ी योजनाओं में भी देरी हुई।
कौन-कौन सी योजनाएँ अब गति पाएंगी
आयुष्मान भारत योजना: इस योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का मेडिकल बीमा दिया जाता है। राज्य सरकार ने इसे लागू करने से इनकार किया क्योंकि उन्होंने अपनी योजना ‘स्वास्थ्य साथी’ को प्राथमिकता दी। अब केंद्र की ओर से इसे लागू करने की प्रक्रिया फिर से शुरू होगी,
West Bengal politics में अब नया बदलाव आने वाला है।
प्रधानमंत्री आवास योजना: ममता सरकार ने इसे ‘बांग्ला आवास योजना’ में बदल दिया था। इस कारण से केंद्र सरकार ने 2022 से फंड रोक दिया था। नई व्यवस्था में इसे पुनः लागू किया जा सकता है।
शिक्षा क्षेत्र की योजनाएँ: प्रधानमंत्री स्कूल, नई भाषा नीति और उल्लास जैसी परियोजनाओं को अब राज्य में लागू किया जा सकेगा।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY): पिछले वर्षों में अटकी हुई सड़क परियोजनाओं को मंजूरी मिलने की संभावना है।
पीएम मत्स्य संपदा योजना: पश्चिम बंगाल ने इसे लॉन्चिंग के दो साल बाद तक लागू नहीं किया था और फंड का केवल एक छोटा हिस्सा ही इस्तेमाल किया गया था।
जल जीवन मिशन: केंद्र द्वारा आवंटित राशि का सही और प्रभावी उपयोग अब संभव होगा।
नमामि गंगे परियोजना: राज्य सरकार ने गंगा नदी की सफाई और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाने में सहयोग नहीं किया। अब केंद्रीय स्तर पर तेजी से कार्य शुरू होगा।
डबल इंजन सरकार का फायदा
BJP TMC conflict: नई सरकार बनने के साथ ही केंद्र और राज्य दोनों के नेतृत्व में योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने पहले ही घोषणा कर दी है कि अगले 45 दिनों में बॉर्डर फेंसिंग का काम पूरा किया जाएगा। इसके अलावा अटकी परियोजनाओं और योजनाओं के कार्यान्वयन में अब तेजी आएगी।
केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय से पश्चिम बंगाल के विकास में नई ऊर्जा आएगी और लंबे समय से रुकी परियोजनाएँ अब गति पाएंगी।
इस तरह, राज्य में विकास और केंद्र की योजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जा चुका है।