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Jharkhand politics controversy: BJP और सरकार के बीच टकराव
08 May 2026
Jharkhand politics controversy: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रचंड जीत के बाद अब झारखंड की राजनीतिक परिदृश्य पर भी हलचल तेज हो गई है। BJP के गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने राज्य की मौजूदा सरकार के लिए बड़ा बयान देते हुए कहा है कि झारखंड सरकार के पास अब सिर्फ एक ही विकल्प है, एनडीए में शामिल होना, जिससे झारखंड की राजनीति में विवाद और बढ़ गया है।
देवघर पहुंचकर मीडिया से बात करते हुए निशिकांत दुबे ने कहा कि झारखंड के चारों ओर स्थित राज्यों में BJP की सरकारें हैं और ऐसे में झारखंड को भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा बनना होगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार NDA में शामिल नहीं होती, तो विपक्षी दल बांग्लादेशी घुसपैठियों को हटाने और आदिवासियों की रक्षा के लिए कार्रवाई करेगा।
संथाल परगना और डेमोग्राफी का मुद्दा
Jharkhand politics controversy: निशिकांत दुबे ने संथाल परगना क्षेत्र का विशेष रूप से जिक्र किया और कहा कि वहां की डेमोग्राफी में बदलाव हुआ है। उनका दावा है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों ने गलत तरीके से आधार कार्ड और नागरिकता प्रमाण पत्र बनवा लिए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के सभी लोगों को हटाया जाएगा। उनके इस बयान के बाद झारखंड की राजनीति में विवाद और गहरा गया है।
साथ ही निशिकांत दुबे ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग आदिवासी बहनों और बेटियों से विवाह करके जमीन हड़प रहे हैं। उनके अनुसार, ऐसी गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
झारखंड चारों ओर से BJP-शासित राज्यों में घिरा
Jharkhand politics controversy: BJP सांसद ने यह भी बताया कि झारखंड चारों तरफ से लैंडलॉक स्थिति में है। उनके मुताबिक, झारखंड के पड़ोसी राज्यों, बिहार, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में BJP या उसके सहयोगी दलों की सरकारें हैं। ऐसे में झारखंड को एनडीए गठबंधन का हिस्सा बनने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। इस बयान के बाद झारखंड की राजनीति में विवाद और तेज हो गया है।
निशिकांत दुबे ने कहा, झारखंड सरकार को अगर सुधारना है और राज्य की जनता के हित में काम करना है, तो उन्हें NDA का सदस्य बनना होगा। यदि यह नहीं होता, तो विपक्षी दल बांग्लादेशियों को हटाने और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठाएगा।
झारखंड में राजनीतिक समीकरण
NDA alliance politics: झारखंड विधानसभा में कुल 81 सीटें हैं। बहुमत के लिए 41 सीटें जरूरी हैं। वर्तमान में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के पास 34 विधायक हैं, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और माले के 2 विधायक हैं। कुल मिलाकर गठबंधन के पास 56 सीटें हैं।
वहीं विपक्ष में BJP के 21 विधायक हैं, इसके अलावा आजसू के 1, JDU के 1 और लो.ज.पा (आर) का 1 विधायक है। JLKMP का भी एक विधायक है। इस राजनीतिक संतुलन को देखते हुए विशेषज्ञ मान रहे हैं कि झारखंड में सत्ता के लिए गठबंधन खेल निर्णायक साबित हो सकता है।
JDU विधायक सरयू राय के बयान से और बढ़ी चर्चाएं
झारखंड में राजनीतिक चर्चा केवल BJP और JMM तक सीमित नहीं है। हाल ही में JDU विधायक सरयू राय ने कहा था कि उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बिना कांग्रेस के समर्थन के सरकार बनाने का प्रस्ताव दिया था। इस बयान के बाद भी यह अटकलें तेज हो गई हैं कि झारखंड में सत्ता संघर्ष और गठबंधन के मामले में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।
पश्चिम बंगाल की जीत का असर झारखंड पर
Nishikant Dubey statement: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में BJP की जीत ने न केवल राज्य की राजनीतिक तस्वीर बदल दी है, बल्कि झारखंड की सियासत में भी दबाव बढ़ा दिया है। भाजपा का यह मानना है कि राज्य की मौजूदा सरकार को अब या तो NDA में शामिल होना पड़ेगा या फिर विपक्षी दल अपनी राजनीतिक ताकत और राष्ट्रीय एजेंडे के तहत कार्रवाई करेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि निशिकांत दुबे का बयान झारखंड सरकार के लिए एक स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा सकता है। उनका यह रुख भाजपा के रणनीतिक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है, जिसमें पड़ोसी राज्यों में अपनी सत्ता को मजबूत बनाए रखना और सीमावर्ती क्षेत्रों में राजनीतिक नियंत्रण बनाए रखना शामिल है।
पश्चिम बंगाल में BJP की जीत ने झारखंड की राजनीति में नई बहस शुरू कर दी है। निशिकांत दुबे के बयानों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि राज्य सरकार के सामने अब NDA में शामिल होने का दबाव बढ़ गया है। संथाल परगना के डेमोग्राफिक बदलाव, बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे और आदिवासियों की जमीन से जुड़ी चिंताएं अब राजनीतिक चर्चाओं का मुख्य केंद्र बन गई हैं।
झारखंड की वर्तमान सियासी तस्वीर यह दर्शाती है कि अगले कुछ महीनों में राज्य में राजनीतिक गठबंधन और सत्ता संघर्ष के नए अध्याय लिखे जा सकते हैं।
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