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शिंदे शिवसेना में बगावत, नीलम गोरे और बच्चू कडू पर विवाद

 27 Apr 2026

महाराष्ट्र में विधान परिषद की 9 सीटों के लिए 12 मई को चुनाव होने हैं, लेकिन शिंदे शिवसेना में बगावत के कारण नीलम गोरे और बच्चू कडू की उम्मीदवारी पर विवाद बढ़ रहा है। विधानसभा उपचुनाव के नतीजे 4 मई को आने के बाद ही यह प्रक्रिया शुरू होगी। राज्य में सत्तारूढ़ शिवसेना के उप मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख एकनाथ शिंदे ने नीलम गोरे और पूर्व विधायक बच्चू कडू को उम्मीदवार बनाने का फैसला किया है।


शिंदे शिवसेना में बगावत

हालांकि, पार्टी के भीतर इस फैसले का स्वागत नहीं किया गया है और शिंदे शिवसेना में बगावत के कारण कई नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता नीलम गोरे के नाम पर असंतोष जता रहे हैं। उनका तर्क है कि गोरे को पहले भी चार बार विधान परिषद भेजा जा चुका है और 71 साल की उम्र में उन्होंने पार्टी को अपेक्षित योगदान नहीं दिया। कईयों का कहना है कि इस सीट के लिए किसी युवा और सक्रिय कार्यकर्ता को उम्मीदवार बनाना चाहिए।

बच्चू कडू की उम्मीदवारी पर विवाद 

महाराष्ट्र एमएलसी चुनाव के तहत विधान परिषद की दूसरी सीट के लिए एकनाथ शिंदे ने पूर्व विधायक बच्चू कडू को चुना है। लेकिन उनके चयन पर भी विरोध दिखाई दे रहा है। कुछ नेताओं ने शिंदे से कहा कि अगर बच्चू कडू को विधान परिषद में भेजना है तो उनकी पार्टी ‘प्रहार जनशक्ति संगठन’ को शिवसेना में विलय कराए। इस विवाद ने पार्टी के अंदरूनी मतभेद को और स्पष्ट कर दिया है।

पिछले अनुभवों का संदेश 

हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में एकनाथ शिंदे ने पार्टी की प्रवक्ता प्रो. ज्योति वाघमारे को राज्यसभा भेजकर यह संकेत दिया था कि अब केवल पार्टी में सक्रिय और काम करने वाले नेताओं को ही प्राथमिकता मिलेगी। यह कदम यह दर्शाता है कि शिंदे संगठन में बदलाव लाने के इच्छुक हैं।


जीत की संभावना और अंतिम समय 

शिंदे की शिवसेना के पास विधानसभा में 57 विधायक हैं, जबकि विधान परिषद की जीत के लिए 28 वोटों का कोटा आवश्यक है। इसलिए, इन दोनों सीटों पर जीत लगभग पक्की मानी जा रही है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अप्रैल है, और अब एकनाथ शिंदे के पास सिर्फ दो दिन शेष हैं। पार्टी के भीतर सैकड़ों नेता और कार्यकर्ता टिकट की दावेदारी कर रहे हैं, जिससे इस फैसले पर दबाव बढ़ गया है।

मालूम होगा कि आगामी दिनों में शिंदे के निर्णय से पार्टी की अंदरूनी राजनीति और टिकट वितरण की दिशा स्पष्ट होगी।

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