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राज्यसभा में विवाद: AAP सांसदों के BJP में शामिल होने पर हलचल

 25 Apr 2026

दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) ने अचानक बड़ा राजनीतिक झटका झेला है, जिससे राज्यसभा में विवाद बढ़ गया। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया। इस कदम से राजनीतिक माहौल अचानक गर्म हो गया है। AAP ने तुरंत इन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।


राज्यसभा में विवाद

AAP के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने घोषणा की है कि वे राज्यसभा के अध्यक्ष से संपर्क करेंगे, जिससे राज्यसभा में विवाद उत्पन्न हो गया है, और इन तीन सांसदों को दलबदल विरोधी कानून (संविधान की 10वीं अनुसूची) के तहत अयोग्य घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। संजय सिंह का कहना है कि नेताओं का बीजेपी में शामिल होना स्वैच्छिक रूप से अपनी मूल पार्टी छोड़ने के समान है, जो 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता का कारण बनता है।

10वीं अनुसूची क्या है

1985 में लागू की गई 10वीं अनुसूची का उद्देश्य राजनीतिक दल-बदल को रोकना और सरकार की स्थिरता बनाए रखना है, और बीजेपी में शामिल होने वाले सांसद राघव चड्ढा का दल-बदल इसी कानून की जांच के दायरे में आता है। इसके तहत सांसद या विधायक स्वेच्छा से अपनी पार्टी छोड़ते हैं या पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करते हैं, तो उन्हें अयोग्य घोषित किया जा सकता है। हालांकि, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य किसी अन्य पार्टी में विलय करने का फैसला करते हैं, तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।

विशेषज्ञों की राय

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होना स्वतः ही अयोग्यता का कारण नहीं बन सकता। दसवीं अनुसूची की धारा 4(2) के तहत तब तक कार्रवाई संभव नहीं है, जब तक कि विधायी दल के दो-तिहाई सदस्य अन्य दल में विलय नहीं कर लेते। सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने भी बताया कि विधायी दल और राजनीतिक पार्टी अलग संस्थाएं हैं, इसलिए सिर्फ पार्टी छोड़ना या व्यक्तिगत रूप से शामिल होना पर्याप्त नहीं है।

बीजेपी में शामिल सांसद 

राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल होने की घोषणा की। राघव चड्ढा ने बताया कि उन्होंने AAP इसलिए छोड़ी क्योंकि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है और निजी लाभ के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि वह जनता के करीब रहने और अपनी राजनीतिक सक्रियता जारी रखने के लिए बीजेपी में शामिल हुए।

AAP का जवाब  

AAP के शीर्ष नेतृत्व ने इन नेताओं को गद्दार करार दिया। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि बीजेपी पंजाब की भगवंत मान सरकार के कामों को रोकने के लिए इस योजना को लागू कर रही है। वहीं, मनीष सिसोदिया ने कहा कि कार्यकर्ताओं की मेहनत और पार्टी के सिद्धांतों के साथ समझौता कर व्यक्तिगत लाभ के लिए यह कदम उठाया गया।

राज्यसभा में स्थिति 

राघव चड्ढा को हाल ही में AAP के राज्यसभा उपनेता पद से हटाया गया था। इसके कुछ ही दिनों बाद उन्होंने बीजेपी में शामिल होने का निर्णय लिया, जिससे पार्टी में विवाद और बढ़ गया।