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ओवैसी का दावा: BJP को कड़ी चुनौती देने में सक्षम AIMIM

 20 Apr 2026

गुजरात के लिंबायत क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिम समुदाय से अपने वोट के महत्व को समझने और उसका इस्तेमाल अपनी जमात के हित में करने की अपील की,  वहीं असदुद्दीन ओवैसी ने BJP को चुनौती देते हुए कहा कि वोट केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि एक अमानत है, जिसे सोच-समझकर इस्तेमाल किया जाना चाहिए ताकि समुदाय की आवाज मजबूत हो सके। 


ओवैसी ने अपने भाषण में कहा कि गुजरात के मुसलमानों को यह दिखाना होगा कि वे लावारिस नहीं हैं, बल्कि एक संगठित और जागरूक समाज हैं, जिसकी आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, इसी संदर्भ में असदुद्दीन ओवैसी का BJP को चुनौती भी सामने आई। उन्होंने खास तौर पर युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में उसी की बात सुनी जाती है, जिसका अपना नेतृत्व होता है।

ओवैसी का BJP को चुनौती

अपने संबोधन के दौरान ओवैसी ने कांग्रेस पार्टी पर भी तीखा हमला बोला। ओवैसी और BJP के बीच टकराव का जिक्र करते हुए कहा कि यह सोच गलत है कि कांग्रेस को वोट देकर बीजेपी को रोका जा सकता है। उनके अनुसार, यदि कोई पार्टी संविधान के दायरे में रहकर बीजेपी को चुनौती दे सकती है तो वह एआईएमआईएम है जो मुस्लिम के अधिकार के लिए मजबूती से खड़ी हो सकती  है।

उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि समुदाय खुद खड़ा हो और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाए, बजाय इसके कि वह पारंपरिक दलों पर निर्भर रहे।

आरोपों पर ओवैसी का जवाब

ओवैसी ने उन आरोपों को भी खारिज किया जिनमें कहा जाता है कि AIMIM के चुनाव लड़ने से बीजेपी को फायदा होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में कई बड़ी पार्टियां सैकड़ों सीटों पर चुनाव लड़ती हैं, जबकि उनकी पार्टी केवल कुछ सीटों पर ही मैदान में उतरती है। 

उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि अगर अन्य दलों को AIMIM की 10-11 सीटों से परेशानी है, तो उन्हें खुद 250-270 सीटें जीतकर दिखानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कब तक एक खास समाज को अपना नेतृत्व विकसित करने से रोका जाएगा।

बंटवारे पर बयान 

अपने भाषण के दौरान ओवैसी ने देश के बंटवारे के मुद्दे पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना गलत है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इतिहास में ऐसे कई संदर्भ हैं, जो बताते हैं कि उस दौर के फैसलों में कांग्रेस की भी भूमिका रही थी।

उन्होंने मौलाना आजाद की किताब 'इंडिया विंस फ्रीडम' का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें यह उल्लेख है कि उन्होंने गांधी और नेहरू से बंटवारा रोकने की अपील की थी, लेकिन हालात अलग दिशा में चले गए।

गौरतलब है कि गुजरात में 26 अप्रैल को स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं, और ऐसे में ओवैसी का यह बयान राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है।

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