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यूक्रेन-भारत वार्ता: स्थायी शांति और द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा

 18 Apr 2026

यूक्रेन के नेशनल सिक्योरिटी और डिफेंस काउंसिल के सेक्रेटरी रुस्तम उमेरोव 17 अप्रैल 2026 को भारत दौरे पर आए, जहां उन्होंने यूक्रेन भारत वार्ता के तहत विदेश मंत्री एस. जयशंकर और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) अजित डोभाल के साथ उच्च-स्तरीय बैठकें आयोजित की गईं। ये बैठकें रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में स्थायी शांति और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए केंद्रित रहीं।


उमेरोव को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की का करीबी माना जाता है, और उन्होंने अपनी बैठकों में ‘फ्रंटलाइन’ पर मौजूदा हालात और सुरक्षा चुनौतियों की विस्तृत जानकारी साझा की। इस दौरान यूक्रेन भारत वार्ता में भारत ने बातचीत और कूटनीति के माध्यम से संघर्ष का शांतिपूर्ण हल निकालने पर जोर दिया।

यूक्रेन-भारत वार्ता 

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की। उन्होंने बताया कि रुस्तम उमेरोव की बैठक और जयशंकर और डोवाल के साथ चर्चा में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग के महत्व और यूक्रेन संघर्ष पर विचार-विमर्श किया, साथ ही सीमा की वर्तमान स्थिति, बातचीत की प्रगति और स्थायी शांति के लिए संभावित कदमों पर गहन चर्चा हुई।

उमेरोव और जयशंकर ने अगस्त 2024 में कीव में राष्ट्रपति जेलेंस्की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बातचीत के बाद जारी संयुक्त बयान में बताए गए समझौतों के कार्यान्वयन पर भी विचार किया।

NSA डोभाल के साथ चर्चा 

यूक्रेनी अधिकारी ने NSA अजित डोभाल के साथ भी विस्तृत बैठक की। इसमें भारत के सैद्धांतिक रुख और बातचीत तथा कूटनीति के जरिए शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया गया। डोभाल ने भारत के स्थायी दृष्टिकोण को दोहराया और कहा कि संघर्ष का हल केवल कूटनीतिक प्रयासों और बातचीत से ही संभव है।

उमेरोव ने इस बैठक के बाद सोशल मीडिया X पर कहा कि यह खुली और सार्थक बातचीत थी, और द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की उम्मीद है। बैठक में दोनों देशों ने सुरक्षा स्थिति के आकलन, द्विपक्षीय संबंधों का पुनर्मूल्यांकन और रूस-यूक्रेन संघर्ष पर साझा दृष्टिकोण पर चर्चा की।

भविष्य के सहयोग की उम्मीदें

बैठकों के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की संभावना बढ़ गई है। भारत ने यूक्रेन संघर्ष का शांतिपूर्ण हल निकालने में कूटनीति और बातचीत के महत्व को दोहराया, जबकि यूक्रेनी पक्ष ने फ्रंटलाइन स्थितियों और सुरक्षा चुनौतियों की जानकारी साझा की।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस उच्च-स्तरीय संवाद से न केवल भारत-यूक्रेन संबंध मजबूत होंगे, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और संघर्ष समाधान के प्रयासों को भी बल मिलेगा।