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राहुल गांधी का बयान: महिला आरक्षण बिल पर तीखा हमला

 17 Apr 2026

लोकसभा में शुक्रवार को महिला आरक्षण बिल और डिलिमिटेशन प्रस्तावों पर बहस के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी का बयान आया, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा जानती है कि यह बिल पारित नहीं होगा, लेकिन इसे पेश करने का असली मकसद देश का चुनावी नक्शा बदलना और महिलाओं का भरोसा जीतना है। राहुल ने इसे प्रजातांत्रिक संरचना में बदलाव की कोशिश बताया।


राहुल गांधी का बयान

राहुल गांधी के बयान में उन्होंने कहा, यह बिल महिलाओं को मजबूत बनाने के लिए नहीं है। इसका असली मकसद भारत के चुनावी बैलेंस को बदलना है। सरकार इसे सत्ता में बने रहने और राजनीतिक फायदा हासिल करने के लिए ढाल की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा का यह कदम पैनिक प्रतिक्रिया का हिस्सा है, जिसमें प्रधानमंत्री दो संदेश देना चाहते थे। पहला, चुनावी नक्शा बदलना और दूसरा, महिलाओं के पक्ष में होने का संदेश देना।

OBC और दलितों की राजनीतिक 

महिला बिल विवाद में राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी के दोहरे मकसद हैं: एक ओर डिलिमिटेशन और आरक्षण विधेयक के माध्यम से ओबीसी और दलितों की राजनीतिक आवाज़ को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जाति जनगणना को बाईपास करके पिछड़े वर्गों और उनके प्रतिनिधित्व को प्रभावित करने की रणनीति अपनाई जा रही है। राहुल ने इसे भारतीय लोकतंत्र की ऐतिहासिक संरचना में हस्तक्षेप करार दिया।

नक्शा बदलने की कोशिश 

राहुल गांधी ने कहा, भाजपा अपनी ताकत के घटने से डर रही है और भारतीय राजनीतिक नक्शे को अपने लाभ के लिए बदलने की कोशिश कर रही है। असम और जम्मू-कश्मीर में भी इसी तरह के कदम उठाए गए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित डिलिमिटेशन एक्सरसाइज का उद्देश्य केवल चुनावी मैप को बदलना और सत्तारूढ़ दल को फायदा पहुंचाना है, न कि महिलाओं की वास्तविक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना।

महिलाओं का सम्मान

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि महिलाएं भारतीय समाज की केंद्रीय शक्ति हैं, और उनकी उपलब्धियां व योगदान नकारा नहीं जा सकता। लेकिन वर्तमान बिल उनके सशक्तिकरण की बजाय राजनीतिक रणनीति का साधन बन गया है। उन्होंने पूरा विपक्ष इस कदम का विरोध करने और लोकतांत्रिक संरचना को बनाए रखने के लिए एकजुट रहने का भरोसा दिलाया।

राहुल गांधी के अनुसार, महिला आरक्षण बिल का मूल उद्देश्य देश की चुनावी राजनीति में बदलाव लाना है, जबकि महिलाओं और पिछड़े वर्गों के वास्तविक अधिकार और प्रतिनिधित्व को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह जाति जनगणना और सामाजिक न्याय की प्रक्रियाओं को दरकिनार करके अपने राजनीतिक लाभ के लिए प्रजातांत्रिक ढांचे में छेड़छाड़ कर रही है।