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महिला आरक्षण बिल: संसद में बहस और विपक्ष की आपत्तियां
17 Apr 2026
संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल को लेकर राजनीतिक बहस जोर पकड़ गई। विपक्षी दलों ने बिल के मूल उद्देश्य, यानी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण, का समर्थन किया, लेकिन परिसीमन और सीटों के फेरबदल को लेकर गंभीर आपत्ति जताई। बहस में प्रमुख नेताओं ने अलग-अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।
महिला आरक्षण बिल
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्पष्ट कहा कि समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण बिल के पक्ष में है। उन्होंने बताया कि लोहिया और सपा के सिद्धांत हमेशा महिलाओं और सामाजिक न्याय के लिए रहे हैं। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सत्ता में बने रहने के लिए बिल ला रही है। अखिलेश ने परिसीमन पर चिंता जताते हुए कहा कि चुनावी नक्शों में बदलाव के जरिए पार्टी का लाभ सुनिश्चित किया जा रहा है।
उन्होंने विपक्ष कोटे की मांग और ओबीसी समावेशन पर बहस के दौरान सवाल उठाया कि क्या इस बिल के जरिए मुस्लिम और ओबीसी महिलाओं को भी वास्तविक आरक्षण मिलेगा या नहीं। साथ ही, यूपी में 600 सीटों के पीछे किसी तरह के षड्यंत्र की संभावना पर भी उन्होंने टिप्पणी की।
गोगोई ने तुरंत लागू करने की मांग
कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि कांग्रेस हमेशा महिला आरक्षण के पक्ष में रही है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि बिल को परिसीमन से जोड़ने की बजाय सीधे लागू किया जाए, ताकि 2024 में ही इसका लाभ मिल सके। गोगोई ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि महिला आरक्षण को लेकर लगातार अड़चनें पैदा की जा रही हैं। उनका कहना था कि यह बिल महिला, जातिगत जनगणना और संविधान विरोधी है।
ओवैसी संघीय ढांचे पर जताई चिंता
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बिल को सिर्फ महिलाओं के हित के लिए नहीं बल्कि दक्षिण भारत पर नियंत्रण बढ़ाने और ओबीसी प्रतिनिधित्व कम करने के प्रयास के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि जनसंख्या के आधार पर लोकसभा की सीटों का बंटवारा दक्षिण भारत के लिए नुकसानदेह हो सकता है, जबकि हिंदी भाषी राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ेगी।
विपक्षी नेताओं का विरोध
केसी वेणुगोपाल और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी बिल पर विरोध जताया। सिब्बल ने इसे केवल परिसीमन नहीं बल्कि संविधान संशोधन करार दिया और सवाल उठाया कि 2023 में पास हुए संशोधन को रद्द क्यों किया गया। उनका कहना था कि बीजेपी अपनी रणनीति के तहत जनता को गुमराह कर रही है।
संसद में महिला आरक्षण बिल पर बहस राजनीतिक दलों के दृष्टिकोण में गहरे मतभेद को उजागर करती है। जबकि अधिकांश नेता महिलाओं के लिए आरक्षण का समर्थन करते हैं, परिसीमन, सीटों का फेरबदल और जनसंख्या आधारित गणना जैसे मुद्दे बहस के केंद्र में हैं। इस बिल का अंतिम स्वरूप और लागू होने का समय अब राजनीतिक नीतियों और रणनीतियों पर निर्भर करेगा।
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