असम सरकार ने पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, वहीं राहुल गांधी का हमला भी सामने आया, उन्होंने सीएम हिमंत सरमा पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। तेलंगाना हाई कोर्ट ने खेड़ा को असम में दर्ज एक मामले में एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी। असम सरकार का कहना है कि अग्रिम जमानत की याचिका हैदराबाद में दायर की गई थी, जबकि खेड़ा ने असम में सीधे जमानत के लिए आवेदन क्यों नहीं किया, इसका कोई ठोस कारण नहीं दिया।
राहुल गांधी का हमला
इस फैसले के बाद राहुल गांधी का हमला सामने आया, जिसमें उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरमा देश के सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्रियों में से एक हैं और राजनीतिक विरोधियों तथा आलोचकों को परेशान करने के लिए सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं। राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कानून की पकड़ से कोई भी नहीं बच सकता और पारदर्शिता व कानून का राज संविधान के मूल्यों पर आधारित होना चाहिए।
तेलंगाना कोर्ट का आदेश
तेलंगाना हाई कोर्ट ने पवन खेड़ा को जमानत दी, जिससे असम सीएम विवाद तेज हुआ, हाई कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी को सक्षम अदालत तक पहुँचने में मदद करना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। कोर्ट ने राज्य की दलील को खारिज कर दिया कि याचिका उनके राज्य में नहीं दी गई थी।
असम सरकार की दलील
असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि ट्रांजिट अग्रिम जमानत की प्रक्रिया का दुरुपयोग हो रहा है और मामले को सीधे असम की अदालत में ले जाकर ही जमानत मांगी जानी चाहिए थी। सरकार का तर्क है कि हाई कोर्ट का आदेश राज्य की न्यायिक प्रक्रिया को दरकिनार करता है।
राजनीतिक असर
राहुल गांधी ने पवन खेड़ा के समर्थन में स्पष्ट संदेश दिया कि कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़ी है और वह राजनीतिक दबाव में नहीं डरने वाली। उन्होंने असम की जनता से भी अपील की कि सत्ता का दुरुपयोग रोका जाए और न्यायिक प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाए।
पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत और असम सरकार की चुनौती ने राज्य में राजनीतिक और कानूनी बहस को फिर से तेज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय इस मामले में अहम साबित होगा, जो न केवल पवन खेड़ा बल्कि असम की न्यायिक प्रक्रियाओं और राजनीतिक सत्ता के उपयोग पर भी प्रकाश डालेगा।