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लालू यादव केस: SC ने CBI रोक को किया खारिज, 17ए उठाने की छूट

 13 Apr 2026

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और RJD के वरिष्ठ नेता लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सोमवार (13 अप्रैल) को जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच ने लालू यादव केस में उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने ‘लैंड फॉर जॉब्स’ मामले में अपने और परिवार के खिलाफ CBI जांच रद्द करने की मांग की थी।


सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि लालू यादव केस में ट्रायल के दौरान लालू भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PCA) की धारा 17ए का मुद्दा उठा सकते हैं। कोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह मामले की मेरिट के आधार पर सुनवाई करे। सुनवाई के दौरान लालू की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी, लेकिन कानूनी मुद्दे उठाने की उन्हें पूरी स्वतंत्रता होगी।

लालू यादव केस, धारा 17ए

इस मामले में प्रमुख कानूनी विवाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए को लेकर है। इस धारा के तहत किसी भी लोक सेवक के आधिकारिक कार्यों से जुड़े निर्णयों की जांच शुरू करने से पहले पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है। लालू की याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया, जिसमें कोर्ट ने इस धारा के दायरे और इसे रेट्रोस्पेक्टिव लागू करने के सवालों को चिन्हित किया, लेकिन फिलहाल इन पर फैसला नहीं दिया।

लालू यादव के वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि बिना पूर्व स्वीकृति के की गई जांच अवैध है। उनका दावा है कि रेलवे में नियुक्तियों को प्रभावित करने के आरोप सीधे लालू के रेल मंत्री के तौर पर आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़े हैं।

वहीं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कोर्ट में कहा कि इस मामले में पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि लालू ने कथित लेन-देन में निर्णय या सिफारिश नहीं की थी।

ट्रायल में 17ए उठाने की छूट

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी भी औपचारिक या अनौपचारिक प्रभाव को लेकर सवाल ट्रायल के दौरान उठाया जा सकता है। कोर्ट ने संकेत दिया कि ऐसे तथ्यात्मक और कानूनी प्रश्नों का समाधान निचली अदालत में ही उचित रहेगा।

दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले ही लालू की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि 2018 में लागू धारा 17ए, 2004 से 2009 के बीच किए गए कथित अपराधों पर लागू नहीं होती। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सुरक्षा केवल उन कृत्यों पर लागू होती है जो आधिकारिक निर्णय या सिफारिश से जुड़े हों।

लैंड फॉर जॉब्स’ मामला क्या 

यह मामला 2004 से 2009 के बीच रेलवे भर्ती घोटाले से जुड़ा है। उस दौरान लालू यादव केंद्र में रेलवे मंत्री थे। आरोप है कि जबलपुर के पश्चिम मध्य रेलवे क्षेत्र में ग्रुप D की कई नियुक्तियों में लालू और उनके सहयोगियों ने नौकरी के बदले लोगों से जमीन लिखवाई।

इस मामले में CBI ने व्यापक जांच की और जनवरी 2026 में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और मीसा भारती समेत 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए।

कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट ने जांच को फिलहाल रोकने से इनकार किया, लेकिन ट्रायल के दौरान लालू को 17ए के तहत कानूनी सवाल उठाने का अधिकार दिया है, जिससे मामला आगे भी कानूनी रूप से गंभीर बना रहेगा।

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