कांग्रेस सांसद और सामरिक मामलों के जानकार शशि थरूर ने पाकिस्तान की ओर से ईरान युद्ध में सीजफायर कराने के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत को अपने भारत के राजनयिक संबंध मजबूत रखते हुए इस पहल को सकारात्मक रूप से देखना चाहिए। थरूर ने कहा कि अगर पाकिस्तान इस पहल में सफल होता है, तो भारत को उसे पहले बधाई देनी चाहिए। उनके अनुसार, क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता देना अब 21वीं सदी की भू-राजनीति की आवश्यकता है, न कि शून्य-सम्बंधी प्रतिस्पर्धा।
भारत के राजनयिक संबंध
थरूर ने कहा कि भारत को ग्लोबल साउथ की ओर से शांति का संदेश फैलाना चाहिए और भारत के राजनयिक संबंध मजबूत रखते हुए ऐसे समय में भारत को अपनी नैतिक और कूटनीतिक ताकत का उपयोग करते हुए युद्धविराम की मांग करनी चाहिए। इसके लिए किसी एक पक्ष की निंदा करना जरूरी नहीं है। इस तरह भारत अपने आप को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर सकता है।
पड़ोसी के नजरिए से देखना जरूरी
थरूर ने यह भी कहा कि भारत को पाकिस्तान शांति पहल को आलोचना की दृष्टि से नहीं बल्कि सतर्क पड़ोसी की तरह देखना चाहिए। यदि इस्लामाबाद अमेरिका और तेहरान को एक ही पन्ने पर ला पाने में सफल होता है, क्योंकि यह क्षेत्रीय शांति प्रयास सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि ऊर्जा बाजार की स्थिरता और भारत के हितों की सुरक्षा में भी मदद करेगा।
शांति का स्वागत करना
थरूर के अनुसार, अगर पाकिस्तान की मध्यस्थता सफल होती है तो भारत को सबसे पहले इसका स्वागत करना चाहिए। किसी पड़ोसी की सफलता भारत की प्रतिष्ठा में कमी नहीं करती, बल्कि यह संकेत देती है कि स्थिर पड़ोसी सभी के लिए लाभकारी हैं। उनका कहना है कि भारत की विदेश नीति अहंकार पर आधारित नहीं, बल्कि स्थिरता और सामर्थ्य पर केंद्रित होनी चाहिए।
शांति हासिल करना आसान नहीं
थरूर ने चेतावनी दी कि ईरान के आंतरिक मतभेद, अमेरिकी राजनीति या इजराइल की असहजता के कारण अगर पहल विफल होती है, तो भारत को इसका जश्न नहीं मनाना चाहिए। इसके बजाय, भारत को अपनी कूटनीतिक भूमिका निभाने के लिए तैयार रहना चाहिए। अमेरिका और ईरान के साथ संबंध भारत को इस दिशा में वैकल्पिक रास्ता दे सकते हैं।
उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि आज की दुनिया अब एकध्रुवीय नहीं रही, चीन-पाकिस्तान गठबंधन और अन्य इस्लामी देशों का समर्थन भू-राजनीतिक समीकरण बदल रहा है। ऐसे समय में भारत को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए पुल-निर्माता की भूमिका निभानी चाहिए और स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि वह शांति के पक्ष में है, चाहे उसे कोई भी संभव बनाए।
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