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प्रियंका गांधी का बयान: ईरान की जनता के साहस की सराहना की

 08 Apr 2026

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी का बयान में उन्होंने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मामलों पर अपनी स्पष्ट राय व्यक्त करते हुए पश्चिमी देशों की आलोचना की और ईरान के लोगों के अदम्य साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि ईरानी पुरुष और महिलाएं अपने देश के संसाधनों की रक्षा के लिए मानव श्रृंखलाएं बना रहे थे, जबकि पश्चिमी शक्तियां घृणित भाषा का उपयोग कर सभ्यता के अंत जैसी धमकियां दे रही थीं।


प्रियंका गांधी का बयान

अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान को धमकी दी थी कि अगर 7 अप्रैल की रात 8 बजे तक बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स, पुल और अन्य ढांचों को नष्ट कर सकता है। इस घटना पर प्रियंका गांधी का बयान में उन्होंने अमेरिका की धमकियों और ईरान के नागरिकों की मानव श्रृंखला को लेकर अपनी चिंता और ईरान के साहस की सराहना व्यक्त की। सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए, जिनमें आम लोग पावर प्लांट्स और अन्य संरचनाओं के चारों ओर खड़े नजर आए। अहवाज के व्हाइट ब्रिज पर भी बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और अपनी एकता दिखाई।

प्रियंका ने नैतिकता पर सवाल उठाए

प्रियंका गांधी ने ईरान के साहस की प्रशंसा करते हुए कहा कि पश्चिमी देशों की तथाकथित नैतिकता का पर्दा अब दुनिया के सामने खुल चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समय सच्चाई को समझने और न्याय के पक्ष में खड़े होने का है। प्रियंका गांधी ने कहा कि नफरत, गुस्सा, हिंसा और अन्याय कभी स्थायी रूप से जीत हासिल नहीं कर सकते; साहस और एकजुटता ही अंततः जीतते हैं।

शांति की दिशा में कदम 


इस बीच राहत की बात यह रही कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ दो हफ़्तों के लिए सीजफायर पर सहमत हो गए। यह सहमति उनके द्वारा तय किए गए रात 8 बजे की समय सीमा से कुछ घंटे पहले ही बनी। इस शांति समझौते ने न केवल ईरान बल्कि पूरे मध्य-पूर्व में तनाव को कम करने में मदद की।

राहुल गांधी का दृष्टिकोण 

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने भी अमेरिकी धमकियों की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि युद्ध हमेशा दुखद होते हैं और सभ्यता के अंत जैसी भाषा या धमकी अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों का किसी भी परिस्थिति में इस्तेमाल न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। 

प्रियंका और राहुल गांधी दोनों ने इस मामले में यह स्पष्ट किया कि हिंसा और डर नहीं, बल्कि साहस और एकजुटता ही स्थायी और सच्ची जीत दिलाती है।

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