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पुडुचेरी चुनाव: कांग्रेस और DMK के बीच सौहार्दपूर्ण मुकाबला
31 Mar 2026
पुडुचेरी विधानसभा चुनाव में इण्डिया गठबंधन के भीतर समन्वय की कमी के चलते कांग्रेस और DMK के बीच सौहार्दपूर्ण मुकाबला कई सीटों पर देखने को मिल रहा है, कांग्रेस और द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम (DMK), जो एक ही गठबंधन का हिस्सा हैं, कई सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। इस स्थिति ने चुनावी मुकाबले को रोचक तो बनाया है, लेकिन गठबंधन की रणनीति पर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस और DMK के बीच सौहार्दपूर्ण मुकाबला
सूत्रों के अनुसार, सीटों के बंटवारे में देरी के कारण कई जगहों पर कांग्रेस और DMK के बीच सौहार्दपूर्ण मुकाबला देखने को मिल रहा है, नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद समझौता जरूर हुआ, लेकिन तब तक कई सीटों पर दोनों दल अपने-अपने उम्मीदवार उतार चुके थे।
इसी वजह से करीब आधा दर्जन सीटों पर कांग्रेस और डीएमके के उम्मीदवार आमने-सामने हैं और दोनों ही दल इन सीटों पर सक्रिय रूप से प्रचार कर रहे हैं। ‘फ्रेंडली फाइट’ की यह स्थिति अब इण्डिया गठबंधन के लिए मुश्किल का कारण बनती जा रही है।
सीट बंटवारे का फॉर्मूला और विवाद
30 सदस्यीय पुडुचेरी विधानसभा के लिए बाद में सीट बंटवारे का एक फॉर्मूला तय होने के बावजूद पुडुचेरी में इण्डिया गठबंधन संकट साफ नजर आ रहा है, जहां इसके तहत कांग्रेस 16 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि डीएमके अपने सहयोगियों के साथ 14 सीटों पर मैदान में है।
डीएमके ने 13 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित किए, जबकि ओझुकराई सीट सहयोगी विदुथलाई चिरुथिगल काची (VCK) को दी गई।
हालांकि, जहां समय पर सहमति नहीं बन सकी, वहां यह समझौता प्रभावी नहीं हो पाया और पार्टियां पहले से घोषित उम्मीदवारों के साथ चुनावी मैदान में उतर गईं।
सहयोगी दलों की अलग रणनीति
गठबंधन के अन्य दलों ने भी अपने स्तर पर उम्मीदवारों की घोषणा की। वीसीके ने ओझुकारई, ओसुडु (आरक्षित) और नेट्टापक्कम (आरक्षित) सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे।
वहीं डीएमके ने पांच अन्य सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए और वामदलों ने भी तीन सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया।
यह पूरा घटनाक्रम दर्शाता है कि सीट बंटवारे को लेकर गठबंधन के भीतर पूरी तरह सहमति नहीं बन पाई थी, जिसका असर अब चुनावी मैदान में दिख रहा है।
एकजुटता पर उठ रहे सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक ही गठबंधन के दलों का आमने-सामने आना उनकी एकजुटता पर सवाल खड़े कर सकता है। इससे मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति भी बन सकती है और विरोधियों को इसका फायदा मिल सकता है।
चुनावी समीकरणों पर असर
पुडुचेरी में यह ‘फ्रेंडली फाइट’ इण्डिया गठबंधन के लिए दोधारी तलवार साबित हो सकती है। एक तरफ यह स्थानीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा को बढ़ा रही है, तो दूसरी ओर गठबंधन की सामूहिक रणनीति को कमजोर भी कर रही है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह स्थिति चुनाव परिणामों को किस तरह प्रभावित करती है।
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