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अमित शाह का नक्सलवाद पर मत, विपक्षी दलों ने किया हमला
31 Mar 2026
लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर सोमवार को जोरदार बहस में अमित शाह का नक्सलवाद पर मत सामने आया, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्य विपक्षी दल और उसके नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए। अपने भाषण में उन्होंने न केवल वर्तमान विपक्ष, बल्कि पूर्व की यूपीए सरकार की नीतियों और निर्णयों पर भी सवाल उठाए।
अमित शाह का नक्सलवाद पर मत
गृह मंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए नेशनल एडवाइजरी काउंसिल (NAC) को एक एक्स्ट्रा-कॉन्स्टिट्यूशनल संस्था बताया। कि अमित शाह का नक्सलवाद पर मत यह है कि इस मंच पर मौजूद कुछ व्यक्तियों के संबंध ऐसे लोगों से रहे हैं, जिन पर नक्सलियों के प्रति सहानुभूति रखने के आरोप लगते रहे हैं।
उनका कहना था कि नीति निर्धारण से जुड़े ऐसे मंचों पर इस तरह के लोगों की मौजूदगी से नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई कमजोर होती है।
बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का जिक्र
अपने संबोधन में हर्ष मंदर का नाम लेते हुए शाह ने दावा किया कि अमित शाह बनाम कांग्रेस नक्सलवाद के मुद्दे पर उनके एक एनजीओ में कथित रूप से ऐसे लोगों को जिम्मेदारी दी गई, जिन पर नक्सली संगठनों से जुड़े होने के आरोप रहे हैं।
इसके अलावा उन्होंने नंदिनी सुंदर, रामचंद्र गुहा और ई. ए. एस. सरमा जैसे नामों का भी उल्लेख किया और कहा कि ये लोग सलवा जुडूम से जुड़े मामलों में सक्रिय रहे हैं।
उन्होंने रामदयाल मुंडा के बयान का हवाला देते हुए यह भी कहा कि नक्सल ऑपरेशन को जरूरत से ज्यादा कठोर बताने जैसी टिप्पणियां सुरक्षा बलों के मनोबल को प्रभावित करती हैं।
राहुल गांधी पर सीधे आरोप
विपक्ष पर हमला तेज करते हुए गृह मंत्री ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कई मौकों पर कथित रूप से नक्सल समर्थक व्यक्तियों या संगठनों के साथ मंच साझा करते देखे गए हैं।
शाह ने 2010 में ओडिशा में लाडो सिकोका के साथ उपस्थिति और 2018 में हैदराबाद में लोकगायक गद्दार से मुलाकात का जिक्र किया। साथ ही हाल के कुछ संगठनों से संपर्क के आरोप भी दोहराए।
भारत जोड़ो यात्रा पर भी सवाल
गृह मंत्री ने यह भी दावा किया कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान नक्सल फ्रंटल संगठनों की भागीदारी के रिकॉर्ड मौजूद हैं। उन्होंने एक वीडियो का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि नक्सली नेता हिडमा के संदर्भ में नारे लगाए गए।
नक्सल हिंसा और राजनीति का मुद्दा
अमित शाह ने कहा कि 1970 के दशक से लेकर मार्च 2026 तक नक्सलवाद को वैचारिक समर्थन मिलता रहा है और इसके लिए उन्होंने विपक्ष की विचारधारा को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने दावा किया कि नक्सली हिंसा में अब तक करीब 20 हजार लोगों की जान जा चुकी है।
विपक्ष का पलटवार
गृह मंत्री के आरोपों के बाद संसद में माहौल गरमा गया। विपक्षी दलों ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर नक्सलवाद के मुद्दे को देश की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।
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