दिल्ली की राजनीति में कथित शीश महल घोटाला एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा, जिसे लेकर कैबिनेट मंत्री प्रवेश वर्मा ने विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा और उनकी तुलना फिल्म ‘धुरंधर’ के किरदार ‘रहमान डकैत’ से की। वर्मा का आरोप है कि केजरीवाल ने शीश महल बनाने के लिए दिल्ली की जनता के पैसों का दुरुपयोग किया और जनता को धोखा दिया। उन्होंने कहा कि पहले शीश महल बन चुका था और दूसरा भी निर्माणाधीन था, लेकिन दिल्ली की जनता ने “धुरंधर” बनकर केजरीवाल को सत्ता से बाहर किया।
दिल्ली, शीश महल घोटाला
दिल्ली की राजनीति में शीश महल घोटाला को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं, प्रवेश वर्मा ने कहा कि जब केजरीवाल मुख्यमंत्री बने, उन्होंने शपथ ली थी कि कोई सरकारी गाड़ी या बंगला नहीं लेंगे। लेकिन शपथ लेने के कुछ ही दिनों में उन्होंने खुद 6 फ्लैग रोड का बंगला अपने कब्जे में ले लिया। वर्मा ने इसे जनता को धोखा देने वाला कदम बताया और कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद शीश महल निर्माण का काम तेजी से शुरू कर दिया गया।
कोविड के बीच शीश महल निर्माण
प्रवेश वर्मा ने केजरीवाल पर टिप्पणी की दिल्ली में दो बड़ी आपदाएं आईं – पहली कोविड और दूसरी आम आदमी पार्टी की सरकार। उन्होंने आरोप लगाया कि कोरोना काल में अस्पतालों और ऑक्सीजन की कमी थी, लेकिन शीश महल का निर्माण जारी रहा। उनके अनुसार, दिल्ली में कोविड अस्पतालों के लिए प्राथमिकता नहीं दी गई, जबकि शीश महल के लिए तेज़ी से काम कराया गया।
टेंडर और खर्च का विवाद
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि शीश महल का पहला टेंडर 7.5 करोड़ का था, जो बाद में बढ़कर 55 करोड़ हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण में बिना अनुमति पेड़ काटे गए और सरकारी अफसरों के घर खाली कराए गए। वर्मा के मुताबिक, शीश महल के लिए 25 करोड़ खर्च किए गए और इसका काम ‘राजा के महल’ की तरह चलाया गया।
लिस्ट और दस्तावेज़
प्रवेश वर्मा ने विधानसभा में एक लिस्ट पेश की, जिसमें शीश महल में लगाए गए सामान का विवरण था। इस लिस्ट को संभालने के लिए 4–5 लोगों की टीम लगाई गई थी। उन्होंने कहा कि इस मामले में दिल्ली सरकार की प्राथमिकताएं गलत थीं और जनता के पैसे का दुरुपयोग हुआ।
वर्मा ने जोर देकर कहा कि जनता ने पिछले चुनाव में केजरीवाल की पार्टी को सत्ता से बाहर किया क्योंकि उनके झूठ और भ्रष्टाचार को समझ लिया था। शीश महल के मामले ने दिल्ली की राजनीति में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है और विपक्षी दल इसे गंभीर मुद्दा बना रहे हैं।
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