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सुप्रीम कोर्ट ने ‘उद्योग’ परिभाषा पर फैसला सुरक्षित रखा

 21 Mar 2026

भारत, औद्योगिक विवाद अधिनियम, उद्योग परिभाषा: सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत ‘उद्योग’ शब्द की परिभाषा से जुड़े विवादित मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस सुनवाई से यह तय होगा कि किन संस्थाओं पर श्रम कानून लागू होंगे और किन पर नहीं। 


मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता में हुई नौ-सदस्यीय संविधान पीठ ने तीन दिन तक इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज, और वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफाड़े, इंदिरा जयसिंह, सीयू सिंह और संजय हेगड़े सहित कई कानूनी विशेषज्ञों ने दलीलें पेश कीं। 

पीठ में मुख्य न्यायाधीश के अलावा न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची, न्यायमूर्ति आलोक अराधे और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली भी शामिल थे।

SC ने ‘उद्योग’ परिभाषा पर फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट ने ‘उद्योग’ परिभाषा पर फैसला सुरक्षित रखा, इसलिए पीठ ने स्पष्ट किया कि वह ‘उद्योग’ शब्द की व्यापक व्याख्या देने वाले 1978 के फैसले की कानूनी वैधता की समीक्षा करेगी। सात-सदस्यीय पीठ ने 21 फरवरी, 1978 को बैंगलोर जल आपूर्ति और मलजल शोधन बोर्ड की याचिका पर यह निर्णय दिया था कि अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, क्लब और सरकारी कल्याण विभाग के कर्मचारी भी औद्योगिक विवाद अधिनियम के दायरे में आते हैं।

इस मामले की समीक्षा के दौरान पीठ यह निर्धारित करेगी कि क्या 1978 के फैसले में न्यायमूर्ति वीआर कृष्ण अय्यर द्वारा दिए गए अनुच्छेद 140 से 144 में बताई गई जांच विधि उपयुक्त है।

नई परिभाषा का असर

सुप्रीम कोर्ट ने ‘उद्योग’ परिभाषा पर फैसला सुरक्षित रखा, और इस संदर्भ में 16 फरवरी को संविधान पीठ के लिए मामले के व्यापक मुद्दे तय किए थे। इसमें यह भी शामिल है कि क्या सरकारी विभाग और उनके संस्थानों द्वारा चलाई जाने वाली सामाजिक कल्याण योजनाओं या अन्य उद्यमों को औद्योगिक गतिविधि माना जा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ‘उद्योग’ की नई परिभाषा कर्मचारियों के अधिकारों और उनके श्रम कानूनों के दायरे को सीधे प्रभावित करेगी। इसका असर न केवल सरकारी विभागों, बल्कि गैर-सरकारी संस्थानों, क्लबों और शैक्षणिक संस्थानों में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों पर भी पड़ेगा।

आगे क्या होगा

पीठ का फैसला आने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन से उद्यम औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत आते हैं और किन पर श्रम कानून लागू नहीं होंगे। कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों के लिए यह फैसला निर्णायक साबित होगा।

सुप्रीम कोर्ट की यह कार्रवाई देश में श्रम कानून और औद्योगिक गतिविधियों के दायरे को लेकर एक नए अध्याय की शुरुआत करने वाली है।