Article
मोहन भागवत का सोशल मीडिया पर बयान, बढ़ानी होगी सक्रियता
19 Mar 2026
आरएसएस प्रमुख ने सोशल मीडिया सक्रियता पर टिप्पणी की: आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया की भूमिका तेजी से बढ़ रही है, खासकर युवाओं के बीच इसका प्रभाव काफी व्यापक हो चुका है। इसी बदलते परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने संगठन की डिजिटल उपस्थिति को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है।
नागपुर में आयोजित मराठी अखबार ‘तरुण भारत’ के शताब्दी समारोह में उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं, इसलिए इन माध्यमों पर सकारात्मक और रचनात्मक कंटेंट के जरिए सक्रिय रहना जरूरी हो गया है।
मोहन भागवत का सोशल मीडिया पर बयान
मोहन भागवत ने स्पष्ट रूप से कहा कि सोशल मीडिया पर पहले से ही मीम्स और रील्स जैसे माध्यम लोकप्रिय हैं। मोहन भागवत का सोशल मीडिया पर बयान इसी संदर्भ में सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि RSS का संचार विभाग कुछ हद तक इन प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय है और स्वयंसेवक भी इसका उपयोग कर रहे हैं, लेकिन आने वाले समय में इसे और बढ़ाने की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि इसे किसी दबाव या अपेक्षा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि समय की मांग के अनुसार संगठन को अपनी उपस्थिति मजबूत करनी चाहिए।
समाज परिवर्तन और संगठन विस्तार पर जोर
संघ प्रमुख ने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और लोगों को जोड़ने का कार्य एक-दूसरे के पूरक हैं। मोहन भागवत का सोशल मीडिया पर बयान इसी सोच को आगे बढ़ाता है, जिसमें उन्होंने कहा कि जब एक समर्पित स्वयंसेवक तैयार होता है, तो वह रचनात्मक कार्यों के जरिए समाज में प्रभाव डालता है और बदलाव की प्रक्रिया को गति देता है।
उनके अनुसार, संगठन का उद्देश्य केवल विस्तार नहीं, बल्कि समाज में सार्थक परिवर्तन लाना भी है, जिसके लिए सक्रिय और जागरूक स्वयंसेवकों की भूमिका अहम है।
बढ़ते कार्य के लिए विकेंद्रीकरण जरूरी
मोहन भागवत ने यह भी बताया कि RSS का कार्यक्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। जैसे-जैसे लोगों की अपेक्षाएं बढ़ी हैं, अलग-अलग क्षेत्रों में स्वयंसेवकों की मांग भी बढ़ी है।
इस स्थिति को देखते हुए संगठन में विकेंद्रीकरण की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि बेहतर कार्यक्षमता के लिए छोटी-छोटी इकाइयों का निर्माण जरूरी है, ताकि स्थानीय स्तर पर काम को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके।
सरकार के साथ समन्वय के लिए नई व्यवस्था
संघ प्रमुख ने यह भी संकेत दिया कि संगठन के बढ़ते कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार और प्रशासन के साथ समन्वय आवश्यक है। इसके लिए एक विशेष समन्वय तंत्र विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के तहत प्रदेश स्तर पर अलग-अलग इकाइयां बनाई जा रही हैं, जो समन्वय बनाए रखने और संभावित बाधाओं को दूर करने में मदद करेंगी।
इस तरह मोहन भागवत के बयान से स्पष्ट है कि RSS अब पारंपरिक ढांचे के साथ-साथ डिजिटल और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ताकि बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप अपनी भूमिका को और प्रभावी बना सके।