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अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से जमानत, मिली बड़ी राहत
19 Mar 2026
मोकामा विधायक अनंत सिंह हत्याकांड: बिहार के मोकामा से छह बार विधायक अनंत सिंह को दुलारचंद हत्याकांड में बड़ी राहत मिली है। पटना हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है, जिससे वे कल जेल से बाहर आ सकते हैं। अनंत सिंह 2025 के विधानसभा चुनाव में मोकामा से जीतकर वर्तमान में विधायक हैं।
अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से जमानत
अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद, वे दुलारचंद यादव हत्याकांड में शामिल होने के आरोप में जेल भेजा गया था। दुलारचंद यादव, जो प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के समर्थक थे, की हत्या चुनावी राजनीति के दौरान हुई थी। इस मामले में पहले पटना सिविल कोर्ट और MP-MLA कोर्ट ने जमानत की अपील खारिज कर दी थी, क्योंकि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें तत्काल रिहा करना उचित नहीं समझा गया।
चुनावी राजनीति से लिया संन्यास
अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने से पहले ही अनंत सिंह ने 16 मार्च को चुनावी राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि अब उनके बेटों को चुनावी जिम्मेदारी संभालने का मौका मिलेगा। उनके जुड़वां बेटे अंकित सिंह और अभिषेक सिंह भविष्य में राजनीति में कदम रख सकते हैं। अनंत सिंह ने राज्यसभा चुनाव में अपने वोट का प्रयोग भी किया था, इसके लिए उन्हें बेउर मॉडल जेल से विधानसभा पहुंचना पड़ा था।
नीतीश कुमार पर छोड़ी जिम्मेदारी
जब उनसे राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, यह पूछा गया तो अनंत सिंह ने जवाब दिया कि इस निर्णय का अधिकार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह संकेत दिया कि अपने पद छोड़ने के बाद पार्टी के अगले नेतृत्व और चुनावी रणनीति का फैसला नीतीश कुमार तय करेंगे।
छह बार से मोकामा के विधायक
अनंत सिंह मोकामा सीट से लगातार छह बार विधायक चुने गए हैं। उन्होंने पहली बार फरवरी 2005 में जीत हासिल की थी और उसी वर्ष अक्टूबर में भी विजय रहे। उनके राजनीतिक करियर और चुनावी अनुभव को देखते हुए उन्हें पार्टी में मजबूत स्थिति हासिल है। उनकी पत्नी नीलम देवी भी 2025 के चुनावों से पहले मोकामा से विधायक रह चुकी हैं।
जमानत और भविष्य की योजना
पटना हाईकोर्ट की जमानत के बाद अनंत सिंह कल जेल से बाहर आ सकते हैं। हालांकि, उन्होंने चुनावी राजनीति से संन्यास लिया है, लेकिन उनके परिवार के सदस्य और समर्थक उनके राजनीतिक मंच को आगे बढ़ा सकते हैं। इस फैसले से मोकामा और बिहार की राजनीतिक परिस्थितियों में महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना बनती है।
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