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वाराणसी गंगा इफ्तार पार्टी, 14 युवक गिरफ्तार, कांग्रेस सवाल
18 Mar 2026
वाराणसी में 14 युवक गिरफ्तार: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी पर एक नाव में रोजा इफ्तार करने पर पुलिस ने 14 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही स्तर पर विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने इसे कानून का दुरुपयोग बताते हुए तुरंत रिहाई की मांग की है।
वाराणसी गंगा इफ्तार पार्टी, कांग्रेस सवाल उठाए
राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि बनारस, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और जहां साल भर में हजारों विदेशी और घरेलू पर्यटक आते हैं, वहां पुलिस सिर्फ नाव में वाराणसी गंगा इफ्तार पार्टी करने वाले युवकों के खिलाफ FIR दर्ज करने में इतनी तत्पर क्यों है। इमरान ने सवाल किया कि आखिर युवकों ने कौन सा कानून तोड़ा, जिस वजह से उन्हें गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई कानून के दुरुपयोग की मिसाल है और पुलिस को तुरंत FIR रद्द करनी चाहिए।
सुप्रिया श्रीनेत का आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी इस मामले में यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वाराणसी गंगा इफ्तार पार्टी के दौरान की गई गिरफ्तारी मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों के खिलाफ है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि गिरफ्तार युवाओं को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए और FIR को निरस्त किया जाना चाहिए।
सपा नेता का नजरिया
समाजवादी पार्टी के मुरादाबाद के पूर्व सांसद डॉ. एस.टी. हसन ने युवकों की गलती को माना, लेकिन गिरफ्तारी के तरीके पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर यह इफ्तार गंगा घाट पर की गई थी, जहां नियमित गंगा आरती होती है, तो यह अनुचित था। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इफ्तार कहीं और भी किया जा सकता था और इसके लिए गिरफ्तार करना आवश्यक नहीं था।
मीडिया रिपोर्ट और सुरक्षा की चिंता
स्थानीय मीडिया के अनुसार, गिरफ्तार युवकों ने नाव में बैठकर इफ्तार का आयोजन किया था। FIR में स्पष्ट नहीं किया गया कि किस कानून के उल्लंघन के आधार पर गिरफ्तारी की गई। इस घटना ने धार्मिक और राजनीतिक बहस को जन्म दिया है और उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक बहस तेज
इस मामले ने बनारस के घाटों और वहां पुलिस की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। कांग्रेस ने गिरफ्तारी को धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया है, जबकि सपा नेता केवल इफ्तार के स्थान को अनुचित मानते हैं। इस घटना ने कानून, धर्म और प्रशासन के बीच संवेदनशील संतुलन पर चर्चा शुरू कर दी है।
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