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महाराष्ट्र धर्मांतरण विधेयक 2026 पास, अब राज्यपाल अनुमोदन बाकी।
18 Mar 2026
धर्मान्तरण विधेयक दण्ड: महाराष्ट्र में धर्मांतरण पर नियंत्रण के लिए लाया गया धर्मांतरण विधेयक 2026 अब विधानपरिषद में भी पास हो गया है। मंगलवार की रात विधानसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच कड़ी बहस के बाद यह बिल विधानपरिषद में भी पारित हो गया। अब सिर्फ राज्यपाल के हस्ताक्षर की प्रतीक्षा है, जिसके बाद यह कानून के रूप में लागू होगा।
महाराष्ट्र धर्मांतरण विधेयक, CM का बयान
महाराष्ट्र धर्मांतरण विधेयक पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि यह कानून धर्मनिरपेक्ष है और किसी एक धर्म के खिलाफ नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल गैरकानूनी धर्मांतरण को रोकने के लिए है। फडणवीस ने यह भी दोहराया कि जो लोग अपनी मर्जी से धर्म बदलना चाहते हैं, उन्हें संविधान के आर्टिकल 25 के तहत पूरी आजादी है और इस कानून से उनके अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
विपक्ष का रुख
महाराष्ट्र धर्मांतरण विधेयक पर विपक्षी दलों, जैसे कांग्रेस और NCP, ने इस बिल की आलोचना करते हुए इसे दुरुपयोग के लिए संवेदनशील बताया। उनका कहना है कि बिल में ‘सबूत का भार आरोपी पर’ रखने की व्यवस्था गलत दिशा में इस्तेमाल हो सकती है। वहीं, शिवसेना (UBT) ने बिल का समर्थन किया है।
कानून की मुख्य बातें
नए विधेयक में गैरकानूनी धर्मांतरण की स्पष्ट परिभाषा दी गई है। इसके तहत किसी भी धर्मांतरण को बलपूर्वक, धोखे या लालच देकर, या विवाह के माध्यम से कराया जाना गैरकानूनी माना जाएगा। इस कानून में सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि सबूत का भार आरोपी पर होगा। अगर किसी पर धर्मांतरण कराने का आरोप लगे, तो आरोपी को यह साबित करना होगा कि धर्मांतरण स्वेच्छा से हुआ था, किसी दबाव में नहीं।
सख्त सजा और जुर्माना
कानून के अनुसार आम धर्मांतरण के मामलों में 3 से 5 साल की जेल और 50 हजार से 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। यदि मामला किसी महिला, नाबालिग या अनुसूचित जाति/जनजाति से जुड़ा हो, तो सजा बढ़कर 7 साल और जुर्माना 2 लाख रुपये तक हो सकता है। अगर किसी समूह का धर्मांतरण (सामूहिक रूपांतरण)पर कराया जाता है, तो सजा 10 साल तक और जुर्माना 5 लाख रुपये तक बढ़ सकता है।
प्रक्रिया और नोटिफिकेशन नियम
इस कानून में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। धर्म बदलने वाले को पहले से जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देनी होगी। धर्मांतरण कराने वाले धर्मगुरुओं या संस्थाओं को भी 30 दिन पहले नोटिस देना होगा। धर्मांतरण के बाद डिक्लेरेशन फाइल करना अनिवार्य है। इसके अलावा, अगर शादी सिर्फ धर्मांतरण के उद्देश्य से की जाती है, तो वह अमान्य घोषित की जा सकती है।
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