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देवेगौड़ा का सोनिया गांधी को पत्र, जताई चिंता
16 Mar 2026
सोनिया गांधी की प्रतिक्रिया: पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा ने हाल ही में सोनिया गांधी को एक पत्र लिखकर संसद में लगातार हो रही रुकावटों पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। देवेगौड़ा ने पत्र में कहा कि हाल के व्यवधानों में मुख्य रूप से विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस सांसदों की भूमिका रही है। उन्होंने उल्लेख किया कि नारेबाजी, तख्तियां दिखाना, धरने और अन्य अवरोध जैसी गतिविधियां संसदीय लोकतंत्र की नींव को कमजोर कर रही हैं।
अपने 65 वर्षों के सार्वजनिक जीवन का हवाला देते हुए, देवेगौड़ा ने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक विपक्ष में रहते हुए भी देखा है कि विरोध के बावजूद संसद की गरिमा और परंपराओं का सम्मान बनाए रखा जाता था। उन्होंने चिंता जताई कि वर्तमान समय में ऐसी गतिविधियों से भारतीय संसदीय व्यवस्था की प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है।
देवेगौड़ा का सोनिया गांधी को पत्र
पूर्व पीएम एच. डी. देवेगौड़ा ने सोनिया गाँधी को पत्र लिखकर चिंता जताई, समान समय में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर सदन में उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होने के बाद उनकी प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने ओम बिरला के संयम, निष्पक्षता और नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने संसदीय मर्यादा बनाए रखने और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोकसभा स्पीकर का कर्तव्य केवल सदन की कार्यवाही का संचालन करना नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं, नियमों और संस्थागत गरिमा की रक्षा करना भी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संसद में कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं है।
ओम बिरला का जवाब
ओम बिरला ने प्रधानमंत्री मोदी के पत्र के लिए धन्यवाद किया और कहा कि यह संदेश केवल पार्टी स्तर पर ही नहीं, बल्कि संसद, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रेरित करेगा। ठीक वैसे ही जैसे देवेगौड़ा का सोनिया गांधी को पत्र प्रेरक रहा था। उन्होंने भरोसा व्यक्त किया कि इस तरह के प्रेरक शब्द हमारे लोकतंत्र की नींव को और मजबूत करेंगे, जिसे स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान सभा के सदस्यों ने स्थापित किया था।
लोकतंत्र की गरिमा बनाये रखना ज़रूरी
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, संसद में लगातार हो रहे अवरोध लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। एच. डी. देवेगौड़ा और प्रधानमंत्री मोदी दोनों ने यह स्पष्ट किया है कि लोकतांत्रिक मर्यादा और संसदीय परंपराओं की रक्षा करना हर निर्वाचित सदस्य की जिम्मेदारी है।
इस घटनाक्रम से यह संदेश मिलता है कि विपक्ष और सरकार दोनों को मिलकर संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक संस्थानों की प्रतिष्ठा बनाए रखने की आवश्यकता है।
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