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DU ने राहुल गांधी को करारा जवाब दिया, जांचें तथ्य पहले
14 Mar 2026
राहुल गांधी डीयू प्रवेश परीक्षा बयान: लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को कांशीराम जयंती पर आयोजित संविधान सम्मेलन में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) को लेकर विवादित बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि यूनिवर्सिटी में जाति देखकर छात्रों को इंटरव्यू में फेल किया जाता है। राहुल गांधी ने कहा, मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी गया था। इंटरव्यू में बच्चों को निकालने का तरीका है - आपकी जाति क्या है भैया, आप इंटरव्यू में फेल।
इसके अलावा, राहुल गांधी ने कांशीराम जी के समाज में समानता के संदेश का हवाला देते हुए वर्तमान राजनीतिक हालात की आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि यदि जवाहरलाल नेहरू आज जिंदा होते, तो कांशीराम कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते। लेकिन अब भाजपा ने समाज को 15% और 85% में बांट दिया है, जिसका लाभ केवल 15% लोगों को हो रहा है।
DU ने राहुल गांधी को करारा जवाब दिया
DU ने राहुल गांधी को करारा जवाब दिया। और यूनिवर्सिटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्पष्ट किया कि DU में प्रवेश CUET स्कोर के आधार पर होता है और कई ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन कोर्सेस के लिए इंटरव्यू अनिवार्य नहीं हैं। यूनिवर्सिटी ने राहुल गांधी से अपील की कि इस तरह का बयान देने से पहले तथ्यों की जांच कर लें।
DU ने आगे कहा कि यदि राहुल गांधी का तात्पर्य फैकल्टी रिक्रूटमेंट से था, तो हाल ही में सभी श्रेणियों में हजारों शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। यूनिवर्सिटी ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे बयान एक शैक्षणिक माहौल को प्रभावित करते हैं और पढ़ाई के लिए ठीक नहीं हैं।
RSS पर भी किया निशाना
अपने भाषण में राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर आरोप लगाने के बाद, DU ने राहुल गांधी को करारा जवाब दिया और कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़े तथ्यों की जांच किए बिना इस तरह के बयान देना सही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS के संगठनात्मक ढांचे में पिछड़े वर्गों का प्रतिनिधित्व नहीं है। राहुल ने कहा कि RSS के प्रचारक सूची में आपको केंद्र में एक भी OBC, एक भी दलित या एक भी आदिवासी नहीं मिलेगा। उनका कहना था कि यह तरीका पूरी तरह से संविधान के खिलाफ है।
यूनिवर्सिटी की अपील
DU ने स्पष्ट किया कि ऐसे बयानों का समाज में गलत संदेश फैलाने का खतरा होता है। यूनिवर्सिटी ने कहा कि राहुल गांधी को इस तरह की टिप्पणियां देने से पहले तथ्यों की जांच करना चाहिए। DU ने कहा, हम ऐसे बयान का कड़ा विरोध करते हैं और इसे सिरे से खारिज करते हैं।
इस घटना ने एक बार फिर से राजनीति और शिक्षा जगत के बीच तल्खी को उजागर किया है। DU ने स्पष्ट किया कि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार पारदर्शी ढंग से होती हैं, और किसी भी छात्र या शिक्षक के साथ भेदभाव का आरोप बेबुनियाद है।
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