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ब्रिक्स बैठक में भारत-ईरान की चर्चा, द्विपक्षीय संबंधों पर बात
13 Mar 2026
भारत-ईरान वार्ता, ब्रिक्स वार्ता: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 12 मार्च की रात ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ महत्वपूर्ण वार्ता की। यह बैठक पिछले कुछ दिनों में दोनों नेताओं के बीच चौथी बातचीत थी। बातचीत का मुख्य फोकस द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री जहाजरानी की सुरक्षा रहा।
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया को बताया कि दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। जयशंकर और अराघची के बीच पिछले संवादों में भी यही मुख्य मुद्दा रहा।
ब्रिक्स बैठक में भारत-ईरान की चर्चा
इस बातचीत में द्विपक्षीय मुद्दों और ब्रिक्स बैठक में भारत-ईरान की चर्चा शामिल थी, जो भारत की क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सहयोग पर प्राथमिकता को दर्शाता है। जयशंकर की लगातार संवाद की कोशिशों से यह स्पष्ट होता है कि भारत दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण परिस्थितियों में संतुलित और सक्रिय कूटनीति को महत्व दे रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की पहल
विदेश मंत्री की बातचीत से पहले ही, प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से फोन पर बात की, जिसमें ब्रिक्स बैठक में भारत-ईरान की चर्चा के साथ क्षेत्रीय शांति और नागरिक सुरक्षा पर जोर दिया गया। 13 दिन पहले पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद यह उनकी पहली वार्ता थी। पीएम मोदी ने क्षेत्र की गंभीर स्थिति और बढ़ते तनाव पर चिंता जताई।
मोदी ने आम नागरिकों की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की रक्षा पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता के रूप में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा, सामान के निर्बाध आवागमन की आवश्यकता को दोहराया। पीएम ने शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कूटनीति और संवाद को प्राथमिक साधन बताया।
कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा की अहमियत
हाल की बातचीत और पीएम मोदी के संवाद से यह स्पष्ट होता है कि भारत ने ईरान और क्षेत्रीय खिलाड़ियों के साथ सुरक्षा, ऊर्जा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर अपनी रणनीति को मजबूती दी है। लगातार संवाद से भारत यह संदेश दे रहा है कि संकट के समय में भी देश संतुलित और सक्रिय कूटनीति अपनाता है।
विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग के अनुसार, जयशंकर और अराघची के बीच हुई पिछली तीन वार्ताओं में भी यही विषय प्रमुख रहे थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत ईरान के साथ सहयोग और संवाद के माध्यम से क्षेत्रीय तनाव को कम करने और ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।