ईरानी दूतावास दिल्ली श्रद्धांजलि: ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के निधन ने जम्मू-कश्मीर में गहरी संवेदनाएं पैदा कर दी हैं। घाटी के कई हिस्सों में लोग उनके लिए शोक व्यक्त कर रहे हैं, वहीं अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ प्रदर्शन भी हुए। श्रीनगर, बडगाम और बांदीपोरा जैसे इलाकों में प्रदर्शनकारी खामेनेई की तस्वीरें लेकर नारे लगा रहे थे। सुरक्षा बलों ने कुछ जगहों पर आंसू गैस का प्रयोग किया और भीड़ को नियंत्रित किया, जबकि अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा पाबंदियां लगाईं।
खामेनेई मौत पर, कश्मीरी नेता दिल्ली में ईरानी दूतावास पहुंचे
इसी दौरान जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कई वरिष्ठ नेता नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पहुंचे। और ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत पर शोक व्यक्त किया। सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रेसिडेंट और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर करते हुए घाटी के लोगों की ओर से संवेदनाएं व्यक्त कीं। उनके साथ सांसद चौधरी मोहम्मद रमजान, सज्जाद अहमद किचलू और गुरविंदर सिंह ओबेरॉय भी मौजूद थे।
पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रेसिडेंट महबूबा मुफ्ती ने भी ईरानी दूतावास और ईरानी कल्चरल सेंटर का दौरा किया। उन्होंने भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली से मुलाकात कर दिवंगत नेता के लिए शांति की प्रार्थना की और ईरान में फंसे कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया।
लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल, कारगिल के चेयरमैन मोहम्मद जाफर अखून और सांसद हाजी हनीफा जान ने भी ईरानी प्रतिनिधियों से मुलाकात कर अपने क्षेत्रों की ओर से सहानुभूति जताई।
ईरान-कश्मीर संबंध और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
हाल ही में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद, कश्मीर और कारगिल जिले में शिया आबादी खासतौर पर बडगाम, श्रीनगर के पुराने शहर और कारगिल में अधिक है। ईरान लंबे समय से इस क्षेत्र में धार्मिक और शैक्षणिक रूप से गहरी पहुंच रखता है। पिछले कुछ वर्षों में ईरान कश्मीरी छात्रों के लिए एक प्रमुख शिक्षा केंद्र बन गया है, खासकर मेडिकल और धार्मिक अध्ययन के लिए।
खामेनेई ने 1980 में कश्मीर का एक ऐतिहासिक दौरा किया था। उस दौर में ईरान के समर्थन से बने अस्पताल का उद्घाटन करने के अलावा, उन्होंने स्थानीय शिया धार्मिक विद्वान आगा सैयद यूसुफ अल-मूसावी अल-सफवी से मुलाकात की। मूसावी कश्मीरी शिया समुदाय में धार्मिक और सामाजिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे और उन्होंने ईरानी मौलवियों के साथ मजबूत रिश्ते बनाए थे।
घाटी में राजनीतिक और सामाजिक असर
ईरानी नेता की मौत के बाद कश्मीर और लद्दाख के नेता दूतावास पहुंचकर शोक व्यक्त कर रहे हैं, जिससे राजनीतिक और भावनात्मक प्रभाव साफ झलकता है। खामेनेई के समर्थन में नारे लगाने वाले प्रदर्शन और दूतावास में नेताओं की मौजूदगी इस क्षेत्र में ईरान की लगातार बढ़ती पहुंच को दर्शाती है।
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