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राहुल गांधी का बसपा वोट बैंक में सेंध लगाने का प्लान, यूपी में कार्यक्रम तय

 11 Mar 2026

राहुल गांधी का बसपा वोट बैंक: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस ने कांशीराम जयंती को लेकर बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। पार्टी ने इस अवसर को सामाजिक परिवर्तन दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है और इसके तहत एक हफ्ते तक राज्यभर में विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस कार्यक्रम की शुरुआत 13 मार्च को लखनऊ के जुपिटर हाल, इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान से होगी, जिसमें लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित होंगे।


राहुल गांधी का बसपा वोट बैंक साधने पर कांग्रेस का फोकस 

कांग्रेस का मानना है कि कांशीराम की विरासत संभाल रही बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती चुनाव के समय अपेक्षाकृत कम सक्रिय रहती हैं। इसी वजह से कांग्रेस इस अवसर का इस्तेमाल करके कांशीराम के समर्थकों और उनके दलित-पिछड़े वोटबैंक को अपने पाले में करने का प्रयास कर रही है। कि राहुल गांधी का बसपा वोट बैंक भी कांग्रेस की ओर आकर्षित हो सके। पार्टी ने दलित-पिछड़े चिंतकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को इस हफ्ते भर चलने वाले कार्यक्रम में न्योता भेजा है।

राहुल गांधी ने लगातार यह संदेश दिया है कि “जिसकी संख्या भारी, उसकी हिस्सेदारी उतनी” और साथ ही जातिगत जनगणना की मांग उठाई है। इसके जरिए कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि कांशीराम के समर्थक अब पार्टी की ओर लौट सकते हैं। इससे पहले राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी पर 400 सीटें आने पर संविधान बदल देने जैसे मुद्दे उठाकर कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक को फायदा पहुंचाया था।

मायावती और सपा की प्रतिक्रिया 

कांशीराम को 1984 में बसपा के गठन का श्रेय दिया जाता है। उनके प्रयासों से उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में दलित और पिछड़े समुदायों को एक मजबूत राजनीतिक समूह में संगठित किया गया। हर साल 15 मार्च को उनकी जयंती बसपा और उनके अनुयायी बड़े पैमाने पर मनाते हैं।। कांग्रेस की कोशिश राहुल गांधी का बसपा वोट बैंक भी इस अवसर पर प्रभावित हो।

इस साल समाजवादी पार्टी ने भी इस अवसर को बड़े पैमाने पर मनाने का ऐलान किया है और इसे PDA दिवस के रूप में मनाने की योजना बनाई है। इस पर मायावती ने समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव की आलोचना की और इसे पूरी तरह से राजनीतिक ड्रामा बताया। उन्होंने कहा कि SP का चाल-चलन हमेशा से बहुजन समाज के नेताओं और आइकॉन के प्रति सम्मानजनक नहीं रहा है।

चुनावी रणनीति के रूप में कदम 

विशेषज्ञों के अनुसार, राहुल गांधी का यह कदम सिर्फ सामाजिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले दलित वोटबैंक पर कांग्रेस का दांव भी है। पार्टी चाहती है कि कांशीराम के समर्थक कांग्रेस की ओर लौटें और इस तरह पार्टी को बहुजन समाज में राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का मौका मिले।

कुल मिलाकर, कांशीराम जयंती पर कांग्रेस का यह हफ्ता लंबा अभियान, राजनीतिक संदेश और दलित वोटबैंक पर ध्यान केंद्रित करने का एक स्पष्ट प्रयास है, जो यूपी चुनाव की रणनैतिक तैयारियों में अहम भूमिका निभा सकता है।

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