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असम सरकार का निर्णय: फखरुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज का नाम बदला

 11 Mar 2026

असम सरकार का निर्णय: असम सरकार ने राज्य के एक प्रमुख मेडिकल संस्थान का नाम बदलने का बड़ा फैसला लिया है. पहले यह संस्थान पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के नाम पर फखरुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के रूप में जाना जाता था, लेकिन अब इसे बारपेटा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के नाम से जाना जाएगा. इस फैसले को असम कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी गई 


राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस निर्णय के पीछे का कारण भी स्पष्ट किया और कहा कि यह बदलाव प्रशासनिक स्पष्टता और नामकरण की एकरूपता के लिए किया गया है.

असम सरकार का निर्णय, नाम बदला

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि असम में ज्यादातर सरकारी मेडिकल कॉलेजों के नाम उस शहर या जिले के नाम पर रखे गए हैं, जहां वे स्थित हैं. उदाहरण के तौर पर गुवाहाटी, धुबरी, सिलचर, बोंगाईगांव, बिस्वनाथ और सोनितपुर में मौजूद मेडिकल कॉलेजों के नाम उसी शहर के आधार पर रखे गए हैं. 

इसी पैटर्न को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट ने फैसला लिया कि बारपेटा में स्थित मेडिकल कॉलेज का नाम भी शहर के नाम पर रखा जाए. इससे नामकरण की व्यवस्था एक जैसी रहेगी और लोगों के बीच किसी तरह का भ्रम भी नहीं रहेगा.

निजी संस्थान समझे जाने का भी था भ्रम 

असम सरकार के निर्णय पर सीएम सरमा ने बताया कि “फखरुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज और अस्पताल” नाम अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों के नामों से अलग लगता था. इसके कारण कई लोग इसे निजी मेडिकल कॉलेज समझ लेते थे.

असम सरकार का निर्णय है कि नाम बदलने से यह भ्रम खत्म होगा और लोगों को स्पष्ट रूप से पता चलेगा कि यह राज्य सरकार का मेडिकल कॉलेज है। इसलिए कैबिनेट ने सर्वसम्मति से इसका नाम बदलकर बारपेटा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल रखने का निर्णय लिया।

पूर्व राष्ट्रपति का सम्मान बनाए रखने की बात

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद का पूरा सम्मान करती है. उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी अन्य महत्वपूर्ण संस्थान का नाम उनके सम्मान में रखा जाएगा, ताकि उनकी विरासत को उचित सम्मान मिल सके.

प्रसिद्ध गायक के सम्मान में भी बड़ा फैसला 

कैबिनेट बैठक में राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने से जुड़े कई अन्य फैसले भी लिए गए. असम के प्रसिद्ध गायक और सांस्कृतिक आइकन जुबीन गर्ग के सम्मान में उनकी समाधि के निर्माण के लिए 10 बीघा जमीन देने को मंजूरी दी गई है.

यह स्थान आने वाले समय में कलाकारों और संगीत प्रेमियों के लिए प्रेरणा स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा.

 ‘अली-ऐ-लिगांग’ पर अब सरकारी अवकाश 

असम की परंपराओं और स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कैबिनेट ने एक और अहम निर्णय लिया है. राज्य सरकार ने अली-आये-लिगांग पर्व के अवसर पर सरकारी छुट्टी घोषित करने को मंजूरी दी है. 

यह त्योहार कृषि और प्रकृति से जुड़ा हुआ है और विशेष रूप से मिसिंग समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. लंबे समय से इस समुदाय द्वारा इस दिन सरकारी अवकाश की मांग की जा रही थी, जिसे अब सरकार ने स्वीकार कर लिया है. इन फैसलों के जरिए असम सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में स्पष्टता लाने के साथ-साथ राज्य की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करने का प्रयास किया है.

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