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IAF के 74 जगुआर लड़ाकू विमान होंगे अपग्रेड, नई मिसाइल और HMDS तकनीक से बढ़ेगी ताकत
09 Mar 2026
भारत की वायु शक्ति को और मजबूत बनाने की दिशा में रक्षा मंत्रालय ने एक अहम कदम उठाया है। मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना (IAF) के 74 जगुआर लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करने के लिए घरेलू रक्षा कंपनियों से टेंडर आमंत्रित किए हैं। इस परियोजना का उद्देश्य पुराने विमानों को नई तकनीक से लैस कर उनकी लड़ाकू क्षमता और पायलट की ऑपरेशनल जागरूकता को बेहतर बनाना है।
कुल 74 विमानों में होगा बदलाव
इस अपग्रेड प्रोजेक्ट के तहत भारतीय वायुसेना के 74 जगुआर विमानों में तकनीकी बदलाव किए जाएंगे। इनमें 24 जगुआर डारिन-II और 50 जगुआर डारिन-III शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन विमानों में पुरानी मैजिक एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणाली को हटाकर नई पीढ़ी की नेक्स्ट जेनरेशन क्लोज कॉम्बैट मिसाइल (NGCCM) लगाई जाएगी।
यह मिसाइल एक एडवांस्ड शॉर्ट रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल होगी, जिसे पहले ही इस बेड़े के लिए चुना जा चुका है। इसके जरिए कम दूरी की हवाई लड़ाई में विमान की क्षमता काफी बढ़ जाएगी।
पायलट को मिलेगा आधुनिक हेलमेट सिस्टम
अपग्रेड के तहत जगुआर विमानों में हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले सिस्टम (HMDS) भी लगाया जाएगा। इस तकनीक की मदद से पायलट अपने हेलमेट के वाइजर पर ही उड़ान से जुड़ी अहम जानकारी और लक्ष्य की स्थिति देख सकेगा।
इस सिस्टम की खास बात यह है कि पायलट सिर्फ लक्ष्य की दिशा में सिर घुमाकर ही मिसाइल को लॉक कर सकेगा। इससे हवाई मुकाबले के दौरान प्रतिक्रिया समय कम होगा और लक्ष्य को निशाना बनाने की सटीकता भी बढ़ेगी।
देश के कई एयरबेस पर होगा अपग्रेड
इस परियोजना के तहत विमानों में बदलाव का काम भारतीय वायुसेना के कई प्रमुख एयरबेस पर किया जाएगा। इनमें अंबाला, जामनगर, भुज, सूरतगढ़ और गोरखपुर शामिल हैं। वहीं तकनीकी परीक्षण बेंगलुरु स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) में किए जाएंगे। इस प्रक्रिया में एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
केवल भारतीय कंपनियों को मिलेगा मौका
सरकार की आत्मनिर्भर भारत नीति को ध्यान में रखते हुए इस टेंडर में सिर्फ भारतीय रक्षा कंपनियों को ही भाग लेने की अनुमति दी गई है। इसके लिए कंपनियों के पास सैन्य विमान संशोधन का अनुभव, रीजनल सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थिनेस (RCMA) का प्रमाणन और एयरोस्पेस क्वालिटी सर्टिफिकेशन होना अनिवार्य है।
चयनित कंपनी को 74 विमानों का अपग्रेड तीन वर्षों के भीतर पूरा करना होगा। हर विमान में बदलाव और परीक्षण की प्रक्रिया लगभग 45 दिनों में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
जगुआर विमान की भूमिका अब भी अहम
जगुआर लड़ाकू विमान को भारतीय वायुसेना में 1970 के दशक के अंत में शामिल किया गया था। यह विमान खास तौर पर लो-लेवल स्ट्राइक मिशन के लिए जाना जाता है। हालांकि वायुसेना धीरे-धीरे राफेल और तेजस मार्क-1ए जैसे नए लड़ाकू विमानों को शामिल कर रही है, लेकिन जगुआर बेड़े को अपग्रेड के जरिए दशक के अंत तक सेवा में बनाए रखने की योजना है।
टेंडर की समयसीमा तय
रक्षा मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए स्पष्ट टाइमलाइन भी तय की है। प्री-बिड मीटिंग 25 मार्च 2026 को होगी, जबकि बिड जमा करने की अवधि 26 मार्च से 13 अप्रैल 2026 तक रखी गई है। इसके बाद 14 अप्रैल 2026 को टेक्निकल बिड खोली जाएगी।
इस अपग्रेड के बाद जगुआर लड़ाकू विमान आधुनिक हथियारों और तकनीक के साथ दुश्मन के हवाई खतरों का सामना करने में पहले से कहीं अधिक सक्षम हो सकेंगे।
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