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हाई कोर्ट ने दिल्ली शराब नीति घोटाले मामले में केजरीवाल-सिसौदिया समेत 23 लोगों को जारी किया नोटिस

 09 Mar 2026

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को शराब नीति घोटाले मामले में दिल्ली की आबकारी नीति से जुड़े कथित घोटाले को लेकर राउज एवेन्यू कोर्ट से बरी अरविंद केजरीवाल और अन्य 22 लोगों को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को निर्धारित की है। इसी दौरान, जांच करने वाले सीबीआई ऑफिसर के खिलाफ ट्रायल कोर्ट द्वारा डिपार्टमेंटल एक्शन लेने के आदेश पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी।


रिहाई पर रोक लगाने की CBI की मांग खारिज

BCCI ने लोअर कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। शराब नीति घोटाले मामले में सीबीआई की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पेश होकर केजरीवाल-सिसौदिया समेत सभी 23 आरोपियों की रिहाई के आदेश पर रोक लगाने की मांग की। हालांकि, हाई कोर्ट ने यह मांग ठुकरा दी। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि ट्रायल कोर्ट को ED केस की सुनवाई तब तक स्थगित करनी होगी, जब तक हाई कोर्ट CBI की रिवीजन अर्जी पर फैसला नहीं कर देता।

CBI का आरोप: घोटाला और साजिश

SG तुषार मेहता ने बताया कि यह देश की राजधानी दिल्ली के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक माना जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हवाला और अन्य तरीकों से भारी राशि ट्रांसफर की गई। मेहता ने कहा कि 164 गवाहों के बयान सामने आए हैं, जो स्पष्ट रूप से बताते हैं कि साजिश कैसे रची गई और रिश्वत किसे दी गई।

विशेष रूप से, विजय नायर नामक व्यक्ति, जो एक राजनीतिक पार्टी का कम्युनिकेशन प्रमुख है, पर 100 करोड़ तक की रिश्वत के मामले में आरोप लगाए गए हैं। इनमें से 44.50 करोड़ रुपए हवाला के जरिए ट्रांसफर किए गए और पार्टी के चुनावी खर्चों के लिए गोवा भेजे गए। 

साक्ष्यों की विस्तृत जांच और अदालत का निर्णय 

एसजी मेहता ने आगे बताया कि सीबीआई ने कई दस्तावेज़, ईमेल और व्हाट्सएप चैट्स इकट्ठा किए। शराब नीति घोटाले मामले में इन साक्ष्यों की वैज्ञानिक तरीके से जांच की गई। अदालत ने 12 दिनों के भीतर इस मामले पर 600 पेज का निर्णय सुनाया। मेहता ने कहा कि जब साजिश का आरोप लगाया जाता है, तो हर पहलू को प्रमाणित करना आवश्यक होता है, क्योंकि साजिश कभी खुलकर नहीं रची जाती।

अगली सुनवाई और कोर्ट के निर्देश

हाई कोर्ट ने सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी कर अगले चरण की सुनवाई 16 मार्च तक के लिए निर्धारित की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट के आदेशों और सीबीआई की याचिका के बीच संतुलन बनाते हुए, किसी भी रिहाई पर फिलहाल रोक नहीं लगाई जाएगी। इस मामले ने राजनीतिक और कानूनी स्तर पर काफी ध्यान खींचा है और आने वाले हफ्तों में हाई कोर्ट की अगली सुनवाई को अहम माना जा रहा है।

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