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ईरान-इजराइल युद्ध के बावजूद भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत, तेल की कोई कमी नहीं

 07 Mar 2026

भारत ने अपनी तेल आपूर्ति को कई स्रोतों से जोड़कर मजबूत किया है। पहले जहां भारत 27 देशों से तेल आयात करता था, अब यह संख्या बढ़कर 40 हो गई है। इसका मतलब यह है कि भारत केवल होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर नहीं है, जो ईरान-इजराइल युद्ध जैसी किसी भी क्षेत्रीय तनाव की स्थिति में संवेदनशील माना जाता है। देश का लगभग 40% तेल होर्मुज मार्ग से आता है, जबकि बाकी 60% अन्य मार्गों से प्राप्त होता है। इस रणनीति के कारण किसी भी एक मार्ग में समस्या आने पर भी देश में तेल की कमी नहीं होगी।


भारत के पास यह तेल कई प्रकार के स्टोरेज विकल्पों में रखा गया है, जिनमें भूमिगत रणनीतिक भंडार, स्टोरेज टैंक, पाइपलाइन, टर्मिनल और समुद्र में चल रहे टैंकर शामिल हैं। प्रमुख रणनीतिक भंडार मैंगलोर, पदुर और विशाखापत्तनम में स्थित हैं। 

सप्लाई विविधता और होर्मुज पर निर्भरता कम

भारत ने अपनी तेल आपूर्ति को कई स्रोतों से जोड़कर मजबूत किया है। पहले जहां भारत 27 देशों से तेल आयात करता था, अब यह संख्या बढ़कर 40 हो गई है। इसका मतलब यह है कि भारत केवल होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर नहीं है। देश का लगभग 40% तेल होर्मुज मार्ग से आता है, जबकि बाकी 60% अन्य मार्गों से प्राप्त होता है। ईरान-इजराइल युद्ध जैसी किसी भी संभावित क्षेत्रीय तनाव की स्थिति में भी इस रणनीति के कारण किसी एक मार्ग में समस्या आने पर देश में तेल की कमी नहीं होगी।

रूस से तेल खरीद जारी, घरेलू कीमतें स्थिर

भारत और रूस के बीच लंबे समय से तेल खरीद का संबंध है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी भारत ने रूस से तेल की खरीद जारी रखी और 2026 तक रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

देश में पिछले चार सालों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अधिक बदलाव नहीं हुआ। तेल कंपनियों ने कीमतों को स्थिर रखने के लिए लगभग 24,500 करोड़ रुपये का नुकसान भी उठाया। सरकार के अनुसार, पिछले 12 सालों में किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन खत्म होने की स्थिति नहीं आई।

रिफाइनिंग क्षमता और निर्यात में अग्रणी 

भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता 258 MMTPA है, जो दुनिया में चौथे स्थान पर आती है। देश की घरेलू जरूरत 210-230 MMTPA है, यानी भारत जरूरत से अधिक तेल रिफाइन कर सकता है। यही वजह है कि भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक भी है।

इस व्यापक रणनीति और मजबूत भंडार के चलते विशेषज्ञों का मानना है कि चाहे ईरान-इजराइल युद्ध जैसा संकट हो, भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत बनी रहेगी और घरेलू ईंधन की उपलब्धता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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