Article

नीतीश की CM पद से विदाई, राज्यसभा की ओर

 06 Mar 2026

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से हटकर राज्यसभा जाने का ऐलान कर राज्य की राजनीति में एक बड़ा बदलाव ला दिया है। लगभग दो दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने वाले नीतीश ने 2026 के राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है, जिससे उनका मुख्यमंत्री के रूप में लंबा दौर समाप्त होने की ओर अग्रसर हो गया है।


राजनीतिक गलियारों में चली चर्चाओं के बाद यह निर्णय सामने आया है कि नीतीश कुमार अपने राज्‍य के मुख्यमंत्री पद से हटकर संसद के ऊपरी सदन में जाने की तैयारी कर रहे हैं। उनकी इस घोषणा को राजनीतिक समझदार एक बड़े सियासी मोड़ के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि इससे बिहार के नेतृत्व में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

केंद्रीय तथा भाजपा नेताओं की मौजूदगी

राज्यसभा नामांकन दाखिल करते समय बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत अन्य NDA नेताओं की मौजूदगी रही, जो इस चरण के राजनीतिक महत्व को दर्शाती है।

Nitish Kumar ने बिहार के लोगों का आभार जताते हुए कहा कि दो दशक से अधिक समय तक जनता के समर्थन से उन्होंने राज्य की सेवा की है और अब नए नेतृत्व को मौका देने का समय है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्‍य में उनका रिश्ता कभी समाप्त नहीं होगा तथा वह नए नेतृत्व को सहयोग और मार्गदर्शन देने को तैयार हैं।

बिहार में सत्ता समीकरण में बदलाव का संकेत

नीतीश के इस फैसले के साथ ही बिहार की सियासी तस्वीर बदलने की संभावना बढ़ गई है। उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद बीजेपी के नेताओं को राज्य के अगले मुख्यमंत्री के रूप में आगे बढ़ने के अधिक अवसर मिलने की चर्चाएँ तेज हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं, जो भविष्य में इस जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बदलाव से केवल बिहार का नेतृत्व ही प्रभावित नहीं होगा, बल्कि राज्य का राजनीतिक समीकरण भी राष्ट्रीय स्तर पर नए रूप में उभर सकता है। पिछले विधानसभा चुनावों में एनडीए की मजबूत जीत और राज्य में बीजेपी की बढ़ती संख्या बल ने पार्टी की भूमिका को और मजबूत बनाया है। 

गठबंधन प्रतिक्रिया और भविष्य की दिशा

बीजेपी के भीतर इस संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर सक्रिय बातचीत जारी है। वहीं विपक्षी दल तथा गठबंधन के नेताओं ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है और नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर अपने विचार साझा कर रहे हैं। अगले कुछ दिनों में जब राज्यसभा सदस्य चुन लिए जाएंगे, तब यह साफ़ होगा कि बिहार के नेतृत्व में कौन नई भूमिका निभाएगा और राज्य की दिशा कैसी होगी।

राजनीतिक महत्व

नीतीश कुमार का यह कदम बिहार में एक युग के अंत का संकेत देता है। उन्होंने लंबे समय तक राज्य की राजनीति पर प्रभाव रखा है, अब राज्य के अगले नेतृत्व का चुनाव एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत करेगा। 

Read This Also:- रूसी तेल पर 30 दिन की छूट: कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा