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राहुल गांधी बोले: वेस्ट एशिया जंग हमारे द्वार तक
05 Mar 2026
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को केंद्र सरकार की विदेश नीति और नीरव प्रतिक्रिया पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वैश्विक भू‑राजनीति एक अत्यंत संवेदनशील चरण में प्रवेश कर चुकी है, लेकिन भारत की प्रतिक्रिया कॉम्प्रोमाइज्ड नजर आ रही है। विदेश में बढ़ते तनाव और सैन्य कार्रवाई के बीच, उन्होंने प्रधानमंत्री के मौन रह जाने को गंभीर चिंता का विषय बताया।
गांधी ने कहा कि विश्व आज एक ऐसी स्थिति का सामना कर रहा है जिसमें हालात पहले से भी खराब होते नजर आ रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने चेताया कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है क्योंकि देश का लगभग 40% तेल हॉर्मुज़ जलडमराग से होकर आता है। वहीं LPG और LNG के आपूर्ति मार्गों पर भी अब तनाव के बादल मंडरा रहे हैं।
हिंद महासागर में जहाज डूबने पर प्रधानमंत्री चुप
Rahul Gandhi ने विशेष रूप से यह आरोप लगाया कि अब यह जंग हमारे करीब तक आ गई है। उन्होंने कहा कि एक ईरानी सैन्य जहाज को हिंद महासागर में डूबा दिया गया लेकिन प्रधानमंत्री ने इस पर कोई प्रतिक्रया नहीं दी। ऐसे समय में जब क्षेत्र में शांति और रणनीतिक स्थिरता अत्यंत आवश्यक है, भारत का रुख अनिर्णीत रहने से दुनिया भर में देश की छवि भी प्रभावित हो रही हैं।
उन्होंने आगे कहा, हमें एक दृढ़ और स्पष्ट नेतृत्व की आवश्यकता है। लेकिन वर्तमान में हमारे पास एक ऐसा प्रधानमंत्री है जिसने हमारी रणनीतिक आज़ादी को ही छोड़ दिया है। राहुल ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत को वैश्विक घटनाक्रम पर अपनी नीति स्पष्ट करनी चाहिए थी।
पूर्व में भी उठ चुके हैं केंद्र पर सवाल
राहुल गांधी ने पिछले दिनों भी केंद्र सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या वह ईरान में हो रहे संघर्ष तथा वहाँ आयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु से जुड़े मामलों पर अपना रुख घोषित करेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि अमेरिका और इज़राइल तथा ईरान के बीच बढ़ती दुश्मनी एक अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र को व्यापक संघर्ष की ओर धकेल रही है, जिससे लाखों लोग, जिनमें भारत के करीब एक करोड़ नागरिक भी शामिल हैं, असमंजस और अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।
दुनिया भर में शांति और संयम की वकालत
Rahul Gandhi ने दोनों पक्षों अमेरिका‑इज़राइल के संयुक्त हमलों और ईरान की जवाबी कार्यवाही की निंदा की और कहा कि संप्रभुता का उल्लंघन और एकतरफा हमले क्षेत्रीय संकट को और बढ़ाएंगे। हिंसा के जवाब में हिंसा केवल विनाश को बढ़ाती है, उनका मानना है कि संवाद और संयम ही शांति की दिशा में एकमात्र रास्ता है। राहुल ने विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा और बढ़ते तनाव के बीच केंद्र की चुप्पी को लेकर गंभीर प्रतिक्रिया दी है, और कहा है कि भारत को स्पष्ट तथा मजबूत वैश्विक रुख अपनाने की आवश्यकता है।
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