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Ballot Paper vs EVM: झारखंड नतीजों के बाद कर्नाटक सरकार के फैसले पर बढ़ी सियासी हलचल

 28 Feb 2026

देश में चुनावी पारदर्शिता को लेकर चल रही बहस के बीच Ballot Paper vs EVM का मुद्दा फिर सुर्खियों में है। हाल ही में झारखंड के नगर निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए, लेकिन परिणाम विपक्षी दलों खासतौर पर कांग्रेस की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे। इन नतीजों ने कर्नाटक में पंचायत चुनाव बैलेट पेपर से कराने के निर्णय पर नई चर्चा छेड़ दी है।


Jharkhand Nikay Chunav Result भले ही औपचारिक रूप से गैर-दलीय थे, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपने-अपने समर्थित उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। 48 सीटों में से भाजपा समर्थित 12 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। वहीं झामुमो समर्थित छह और कांग्रेस समर्थित केवल दो उम्मीदवार सफल रहे। इन परिणामों ने उस दावे को चुनौती दी है, जिसमें EVM को भाजपा की जीत का प्रमुख कारण बताया जाता रहा है।

बैलेट पेपर से मतदान होने के बावजूद विपक्ष को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, जिससे चुनावी रणनीति और आरोपों की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लंबे समय से EVM की पारदर्शिता पर सवाल उठाते रहे हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi कई बार चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगा चुके हैं। इसी पृष्ठभूमि में कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने आगामी पंचायत चुनाव बैलेट पेपर से कराने का निर्णय लिया था।

इस फैसले को कैबिनेट की मंजूरी भी मिल चुकी है और इसे कानूनी रूप देने के लिए संशोधन विधेयक लाने की तैयारी है। हालांकि, कर्नाटक में ही इस निर्णय को लेकर मतभेद सामने आने लगे हैं। विपक्ष का तर्क है कि झारखंड के नतीजे यह दर्शाते हैं कि चुनावी हार-जीत का संबंध केवल मतदान प्रणाली से नहीं, बल्कि जमीनी संगठन, स्थानीय मुद्दों और जनसमर्थन से भी होता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या Siddaramaiah सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगी या बैलेट पेपर के पक्ष में आगे बढ़ेगी।

झारखंड के परिणामों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या बैलेट पेपर को लेकर उठाए गए सवाल और दावे अब नए सिरे से परखे जाएंगे। फिलहाल, कर्नाटक सरकार का कहना है कि बैलेट पेपर से मतदान और मतगणना प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। लेकिन झारखंड के ताजा नतीजों ने बहस को एक अलग दिशा दे दी है, जहां चुनावी सफलता का पैमाना केवल तकनीक नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति और जनविश्वास भी माना जा रहा है।