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अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष: रूस और ईरान ने कूटनीतिक समाधान का आह्वान किया।

 27 Feb 2026

अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष का ताज़ा परिदृश्य और बढ़ती हिंसा


वर्तमान में अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष ने एक नए, अलोकप्रिय मोड़ को छू लिया है, जो दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद असिफ ने खुले युद्ध (open war) का संकेत देते हुए कहा कि पाकिस्तान की सहनशीलता समाप्त हो चुकी है और अब वह तालिबान-शासित अफगानिस्तान के खिलाफ “खुला युद्ध” चला रहा है। यह बयान 27 फरवरी 2026 को सामने आया, जब दोनों पक्षों ने समानांतर रूप से सीमा पार हवाई और ज़मīn हमलों में अपनी प्रतिक्रिया दी।

पाकिस्तानी वायुसेना ने काबुल, कंधार और पक़्तिया में लाल निशाना साधते हुए सैन्य ठिकानों और तालिबान पोस्टों पर हवाई हमले किए; पाकिस्तान की ओर से दावा किया गया कि 130 से अधिक लड़ाके ढेर किए गए और कई पोस्ट नष्ट कर दिए गए। अफ़ग़ानिस्तान की ओर दावा यह है कि उसने सीमा पार जाकर पाकिस्तानी सैनिकों को निशाना बनाया, जिसमें दो दर्जन से ज़्यादा सैनिकों की हताहत होने की सूचना दी गई है। इस पर दोनों देशों के बयान अलग-अलग और विवादास्पद रहे हैं, जिससे अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष का चारों ओर तनाव और बढ़ गया है।

विश्लेषकों के अनुसार इस संघर्ष की वजह लंबे समय से सीमा-पार आतंकवादी समूहों और सुरक्षा मुद्दों पर असहमति रही है। सीमा पर खैबर पख़्तूनख़्वा और डुरांड लाइन के आसपास होने वाले हमलों, कट्टरपंथी समूहों के ठिकानों और नियंत्रण-सम्बन्धी समस्याओं ने दशकों से भरोसे को कमजोर किया है।

रूस और ईरान की चिंता: कूटनीति और रिश्तों की बहाली की कोशिश


अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति पर चिंता व्यक्त की जा रही है, खासकर अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष के बढ़ते परिणामों को देखते हुए। रूस ने पहले ही भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने के लिए राजनीतिक तथा कूटनीतिक बातचीत का समर्थन किया था। रूसी विदेश मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच मतभेदों को शांतिपूर्ण माध्यमों से समाधान करने और तनाव को कम करने के लिए बातचीत आवश्यक है।

इसी तरह, ईरान ने भी पाकिस्तान और अफगानिस्तान से संयम बरतने और तत्काल संवाद स्थापित करने का आग्रह किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों को एक दूसरे के प्रति सम्मान और संयम दिखाना चाहिए और घातक घटनाओं को और बढ़ने से रोकने के लिए कूटनीतिक बातचीत को प्राथमिकता देनी चाहिए। तेहरान ने सहयोग और समझ बढ़ाने के लिए अपनी भूमिका निभाने की तैयार रहने का संकेत भी दिया है।

रूस और ईरान की यह पहल यह दर्शाती है कि क्षेत्रीय शक्तियाँ इस संघर्ष के नकारात्मक प्रभावों को समझ रही हैं और मौजूदा संघर्ष को और अधिक बढ़ने से रोकने के लिए कूटनीतिक बातचीत के रास्ते को महत्व दे रही हैं। वैश्विक नेताओं ने भी अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय कानून के प्रति दोनों पक्षों की जिम्मेदारियों का पालन करने का आग्रह किया है, ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

मानवीय, भू-राजनीतिक और भविष्य के समाधान की चुनौतियाँ


अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष अब सिर्फ दो देशों के बीच सीमित लड़ाई नहीं रह गया है; यह एक व्यापक मानवीय संकट भी बनता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और मानवीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि हालात के बिगड़ने से सीमান্তवासी और पलायन करने वाले लोगों की कठिनाइयाँ और बढ़ सकती हैं। विशेष रूप से अफगान शरणार्थी, जो पहले ही लाखों की संख्या में पाकिस्तान में बसे हुए थे, संघर्ष के बिगड़ने पर वापस अपने देश लौटने या दूसरी जगहों की तलाश में मजबूर हो सकते हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते हैं, तो यह संघर्ष व्यापक रूप से फैल सकता है, जिससे न केवल दक्षिण एशिया, बल्कि मध्य एशिया और मध्य पूर्व के देशों के बीच भी तरक्की तथा सहयोग प्रभावित हो सकता है। तालिबान शासन, पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व और पड़ोसी देशों के बीच किसी भी प्रकार के स्थायी समाधान या गठबंधन के अभाव के कारण यह संघर्ष और जटिल हो सकता है।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आर्थिक प्रतिबंध, आतंकवादी हिंसा, और राजनीतिक अस्थिरता जैसे मुद्दों का समाधान सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि बातचीत, विश्वास-निर्माण उपायों तथा संयुक्त आतंकवाद विरोधी रणनीतियों से ही संभव है। इस संदर्भ में, रूस, ईरान और अन्य क्षेत्रीय शक्ति केंद्रों द्वारा कूटनीति और शांतिपूर्ण वार्ता का समर्थन इस दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।