Article
मुकुल रॉय का निधन: टीएमसी नेता का राजनीतिक सफर और विरासत
24 Feb 2026
राजनीतिक जगत में शोक की लहर
पश्चिम बंगाल की राजनीति के दिग्गज नेता और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय के निधन ने राजनीतिक जगत में शोक की लहर पैदा कर दी है। मुकुल रॉय की मौत की खबर सामने आते ही पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में शोक और संवेदना का माहौल बन गया। कभी टीएमसी में नंबर दो की हैसियत रखने वाले मुकुल रॉय ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कई अहम भूमिकाएं निभाईं और राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके निधन पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक विभिन्न दलों के नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की है।
उतार-चढ़ाव भरा राजनीतिक सफर
मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी, लेकिन बाद में ममता बनर्जी के साथ मिलकर तृणमूल कांग्रेस को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संगठन को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और पार्टी के विस्तार में उनका योगदान अत्यंत अहम माना जाता है। यही कारण था कि उन्हें लंबे समय तक पार्टी में दूसरा सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता रहा। मुकुल रॉय की मौत के बाद उनके इस योगदान को फिर से याद किया जा रहा है।
चुनावी रणनीतिकार और संगठनकर्ता के रूप में पहचान
टीएमसी में रहते हुए मुकुल रॉय ने चुनावी रणनीति, संगठन निर्माण और राजनीतिक प्रबंधन में अपनी दक्षता का परिचय दिया। वे पार्टी के उन नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने बंगाल में वाम मोर्चे के लंबे शासन को चुनौती देने में अहम भूमिका निभाई। ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण चुनावों में पार्टी को जीत दिलाने में योगदान दिया। Mukul Roy death ने एक ऐसे रणनीतिकार की कमी को उजागर कर दिया है, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।
पार्टी परिवर्तन और वापसी की कहानी
हालांकि, समय के साथ उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद सामने आए। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का रुख किया और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी नई भूमिका की शुरुआत की। भाजपा में शामिल होने के बाद भी वे पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा बने रहे। बाद में उन्होंने फिर से टीएमसी में वापसी की, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बंगाल की राजनीति में उनकी पकड़ और प्रभाव बरकरार था।
पर्दे के पीछे से प्रभावी नेतृत्व
मुकुल रॉय की राजनीतिक शैली की खासियत यह थी कि वे पर्दे के पीछे रहकर भी बड़े फैसलों को प्रभावित करने की क्षमता रखते थे। संगठनात्मक कौशल, राजनीतिक समीकरणों की समझ और विभिन्न दलों के नेताओं से संवाद बनाए रखने की उनकी क्षमता उन्हें एक विशिष्ट नेता बनाती थी। यही वजह है कि Mukul Roy death के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया।
देशभर के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता बताते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की, वहीं ममता बनर्जी ने भी उन्हें पुराने साथी के रूप में याद करते हुए शोक प्रकट किया। अन्य कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेताओं ने भी उनके निधन को बंगाल की राजनीति के लिए बड़ी क्षति बताया।
राजनीतिक विरासत और सीख
मुकुल रॉय का जीवन इस बात का उदाहरण है कि राजनीति में रणनीति, संगठन और संवाद का कितना महत्व होता है। उन्होंने अपने करियर में कई बार राजनीतिक चुनौतियों का सामना किया, लेकिन हर बार नई परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालते हुए सक्रिय बने रहे। उनका अनुभव और समझ आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सीख के रूप में देखा जाएगा।
एक युग का अंत
कुल मिलाकर, मुकुल रॉय का निधन केवल एक नेता की विदाई नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति के एक महत्वपूर्ण युग का अंत है। Mukul Roy death ने यह साबित कर दिया कि उनकी राजनीतिक विरासत और योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
Read This Also:- ममता बनर्जी बनाम भाजपा: बंगाल कहता है “सब कुछ सह सकता है, पर किसी के आगे नहीं झुकता”।