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नवजोत कौर सिद्धू: राहुल कुर्सी के लिए फिट नहीं।
17 Feb 2026
नवजोत कौर सिद्धू का ‘PM मोदी’ की तुलना में राहुल गांधी पर कटु वार
पंजाब की राजनीति में एक बार फिर नवजोत कौर सिद्धू ने केंद्र-स्थानीय नेतृत्व के बीच तनाव को सार्वजनिक मंच पर ले आया है। वर्षों तक कांग्रेस से जुड़ी रही सिद्धू ने हाल ही में पार्टी से अपने इस्तीफे के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखे आरोप लगाए हैं। कोयंबटूर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को पार्टी में निर्णय-प्रक्रिया का अहसास नहीं है और वह जमीनी हकीकत से कटे हुए हैं। सिद्धू ने यह भी कहा कि गांधी की सोच और कामकाज में फर्क है — “जो कहा जाता है, वह किया नहीं जाता।”
उन्होंने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी ज़िक्र किया और कहा कि यदि कोई राहुल गांधी को कहता है कि वे PM मोदी की तरह हो जाएँ, तो वे जमीनी हकीकत से पूरी तरह अनभिज्ञ दिखते हैं। यह टिप्पणी राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में कांग्रेस के नेतृत्व पर एक गंभीर सवाल खड़ा करती है कि क्या राष्ट्रीय नेतृत्व पार्टी के उत्थान-पतन को सही ढंग से समझ पा रहा है या नहीं।
सिद्धू ने आरोप लगाया कि पंजाब कांग्रेस में टिकट पहले से ही बिक चुके हैं और पार्टी का नेतृत्व भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में है। “जो कुर्सी पर बैठा हुआ है, वह उस कुर्सी के काबिल नहीं है” — यह बात उन्होंने दोहराई, जिससे राजनीतिक हलकों में सुर्खियाँ बनी हैं।
कांग्रेस की आंतरिक लड़ाई का बड़ा खुलासा: क्या राहुल गांधी ने खो दी नियंत्रण की डोर?
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि नवजोत कौर सिद्धू के बयान सिर्फ व्यक्तिगत आलोचना नहीं हैं बल्कि कांग्रेस में चल रही गहरी फूट और नेतृत्व संकट का संकेत हैं। सिद्धू ने कहा कि वह कई महीनों से राहुल गांधी से मिलने की कोशिश कर रही थीं लेकिन उनसे मुलाक़ात नहीं हो पाई, जिससे यह संदेश जाता है कि राष्ट्रीय नेतृत्व और स्थानीय संगठन के बीच संवाद की खाई व्यापक होती जा रही है।
अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, सिद्धू पहले भी पंजाब कांग्रेस नेतृत्व पर लम्बे समय से असंतोष जता चुकी थीं तथा टिकट वितरण और रणनीति को लेकर पार्टी के फैसलों से नाखुश थीं। कुछ महीने पहले ही उन्होंने यह दावा किया था कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री चेहरे के लिए विकेट पर बड़ी रकम की मांग की जा रही है, जिससे पार्टी में व्यापक विवाद पैदा हुआ था — इस बयान के बाद उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया था।
कांग्रेस पार्टी के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है क्योंकि पंजाब जैसे महत्वपूर्ण राज्य में चुनाव के समय ऐसे आरोप और मतभेद आम जनता के सामने पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर सकते हैं। यही नहीं, सिद्धू ने राहुल गांधी की कार्यशैली को सपनों की दुनिया में जीने जैसा बताया, जिससे यह लगता है कि पार्टी नेतृत्व और उसके कार्यकर्ता के बीच संवाद की कमी साफ झलकती है।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर कांग्रेस नेतृत्व समय रहते इन मतभेदों का समाधान नहीं करता, तो पंजाब में पार्टी की साख प्रभावित हो सकती है। यहां तक कि सिद्धू के बयान ने राहुल गांधी की आलोचना को और भी बढ़ावा दिया है, और विपक्ष तथा मीडिया दोनों में चर्चा का विषय बना दिया है।
आम जनता और राजनीतिक वर्ग में प्रतिक्रिया: क्या कांग्रेस बच पाएगी?
जब राजनीतिक सुगबुगाहट का विषय किसी ऐसे नेता द्वारा उठाया जाता है, जो पहले खुद पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल था, तो उसकी गूंज जनता तक भी पहुंचती है। नवजोत कौर सिद्धू की आलोचना पर सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग सिद्धू के बयान को सही ठहरा रहे हैं और कहते हैं कि पार्टी नेतृत्व को जमीनी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, जबकि दूसरे लोग इसे एक व्यक्तिगत राजनीति बताकर उभरते मतभेदों को कम बताते हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, इस बयान का प्रभाव कांग्रेस के वोटरों पर पड़ेगा। पंजाब जैसे राज्य में जहां राजनीतिक जागरूकता उच्च है, ऐसे विवाद पार्टी को वोट बैंक के नुकसान की ओर भी ले जा सकते हैं। राजनीतिक टिप्पणीकारों का मानना है कि कांग्रेस को हर स्तर पर कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करने की आवश्यकता है और नेतृत्व को अपने फैसलों को अधिक पारदर्शी बनाना होगा।
दूसरी ओर, विपक्षी दल इस विवाद का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा और अन्य राजनीतिक पार्टियाँ कांग्रेस की एकजुटता और नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठा रही हैं। सिद्धू के बयान ने कांग्रेस के प्रचार-रणनीति की भी समीक्षा की ज़रूरत स्पष्ट कर दी है, खासकर ऐसे समय में जब हर राजनीतिक पार्टी अपने विचारों और नेतृत्व क्षमता को जनता के सामने मजबूती से रख रही है।
इस प्रकार, नवजोत कौर सिद्धू के तीखे बयान ने न केवल कांग्रेस के अंदरूनी मतभेद को उजागर किया है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़े बहस को भी जन्म दिया है — कि क्या पार्टी के शीर्ष नेतृत्व स्थितियों से अवगत है और क्या वह समय पर सही निर्णय ले पा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आगामी चुनावों में इसका प्रभाव स्पष्ट होगा और कांग्रेस को अपने नेतृत्व और रणनीति की समीक्षा जल्द से जल्द करनी चाहिए।