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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन
14 Feb 2026
अमेरिका का पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर देशभर में किसानों का असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। पंजाब से लेकर तमिलनाडु और केरल तक हजारों किसान सड़कों पर उतर आए हैं। उनका कहना है कि इस समझौते से भारतीय कृषि और छोटे किसानों को आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है।
मोदी सरकार के खिलाफ किसानों का विरोध
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए किसानों का कहना है कि अगर अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार ज्यादा खोला गया, तो सस्ते आयात के कारण घरेलू फसलें प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकती हैं। खासकर सोयाबीन तेल, डीडीजीएस यानी पशु आहार में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद और संभावित जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों को लेकर आशंकाएं जताई जा रही हैं। कई किसान संगठनों का मानना है कि इससे देश की कृषि आत्मनिर्भरता कमजोर हो सकती है।
हालांकि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पर केंद्र सरकार का कहना है कि संवेदनशील कृषि क्षेत्रों, जैसे डेयरी और पॉल्ट्री, को वार्ता से बाहर रखा गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रमुख जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों के आयात पर कोई ढील नहीं दी जाएगी। वहीं वाणिज्यिक मंत्री पीयूष गोयल ने किसानों को भरोसा दिलाने की कोशिश की है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं होगा।
फिर भी, किसानों के बीच 2020-21 के बड़े आंदोलन को यादें ताजा हैं, जब लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार को कृषि कानून वापस लेने पड़े थे। इसी वजह से मौजूदा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को भी राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
केंद्र सरकार का क्या कहना है?
हालांकि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पर केंद्र सरकार का कहना है कि संवेदनशील कृषि क्षेत्रों, जैसे डेयरी और पॉल्ट्री, को वार्ता से बाहर रखा गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रमुख जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों के आयात पर कोई ढील नहीं दी जाएगी। वहीं वाणिज्यिक मंत्री पीयूष गोयल ने किसानों को भरोसा दिलाने की कोशिश की है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं होगा।
फिर भी, किसानों के बीच 2020-21 के बड़े आंदोलन को यादें ताजा हैं, जब लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार को कृषि कानून वापस लेने पड़े थे। इसी वजह से मौजूदा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को भी राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
जंतर- मंतर पर भी प्रदर्शन
नई दिल्ली के जंतर–मंतर समेत कई जगहों पर हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में किसानों के साथ मजदूर संगठनों ने भी भाग लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले किसानों और ग्रामीण समुदायों से व्यापक संवाद होना चाहिए।
अब आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है, और क्या भारतीय किसानों का विरोध प्रदर्शन किसी बड़े राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले सकता हैं।
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