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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: संशोधित तथ्यपत्र से कृषि को लेकर चिंताएं बढ़ीं
11 Feb 2026
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित भारत अमेरिका व्यापार समझौता एक बार फिर सुर्खियों में है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े एक संशोधित फैक्टशीट (तथ्य पत्र) ने इस समझौते को लेकर नई राजनीतिक और आर्थिक बहस छेड़ दी है। खास तौर पर दालों, कृषि उत्पादों और आयात शुल्क से जुड़े बिंदुओं में बदलाव ने भारत में किसानों और नीति विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
फैक्टशीट में क्या बदला?
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन से जुड़े दस्तावेज़ों में भारत अमेरिका व्यापार समझौता से संबंधित कुछ तथ्यों को संशोधित किया गया है। इसमें यह दावा किया गया है कि भारत ने अमेरिकी दालों और कृषि उत्पादों पर उच्च शुल्क लगाए हुए हैं, जिससे अमेरिकी किसानों को नुकसान हो रहा है। संशोधित फैक्टशीट में यह भी संकेत दिया गया है कि अमेरिका भारत पर कृषि बाजार खोलने का दबाव बना सकता है।
दालें और कृषि क्षेत्र क्यों हैं संवेदनशील?
भारत दुनिया के सबसे बड़े दाल उत्पादक और उपभोक्ता देशों में से एक है। करोड़ों छोटे और सीमांत किसान दालों की खेती पर निर्भर हैं। यदि अमेरिकी दालों पर आयात शुल्क कम किया जाता है, तो सस्ते आयात से घरेलू किसानों को नुकसान हो सकता है। इसी कारण भारत अमेरिका व्यापार समझौता के तहत कृषि और दालों से जुड़े प्रावधानों को भारत हमेशा बेहद संवेदनशील मानता रहा है।
भारत सरकार का रुख
भारत सरकार का कहना है कि किसी भी व्यापार समझौते में किसानों के हित सर्वोपरि रहेंगे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सरकार कृषि क्षेत्र को बिना सुरक्षा के वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए नहीं छोड़ेगी। भारत यह भी तर्क देता है कि उसकी कृषि नीति खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण रोजगार और किसानों की आय से सीधे जुड़ी हुई है, और भारत अमेरिका व्यापार समझौता में इन पहलुओं की अनदेखी नहीं की जा सकती।
अमेरिका की रणनीति और दबाव
अमेरिका लंबे समय से भारत के कृषि बाजार में ज्यादा पहुंच चाहता रहा है। अमेरिकी किसान संगठन और एग्री-बिजनेस कंपनियां भारत को एक बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में देखती हैं। संशोधित फैक्टशीट को इसी रणनीति के तहत देखा जा रहा है, ताकि भारत पर शुल्क कम करने का दबाव बनाया जा सके।
विशेषज्ञों की राय
आर्थिक और व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि फैक्टशीट में किए गए बदलाव राजनीतिक संदेश भी हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका अकसर व्यापार वार्ताओं में ऐसे दस्तावेज़ों का उपयोग दबाव बनाने के लिए करता है। हालांकि, भारत के लिए यह जरूरी है कि वह तथ्यों के साथ अपनी स्थिति को स्पष्ट रूप से वैश्विक मंच पर रखे।
भारत-अमेरिका संबंधों पर असर
भारत और अमेरिका के रिश्ते रणनीतिक, रक्षा और तकनीकी सहयोग के कारण मजबूत हुए हैं, लेकिन व्यापार हमेशा एक जटिल मुद्दा रहा है। कृषि और शुल्क जैसे विषय बार-बार दोनों देशों के बीच मतभेद का कारण बनते हैं। इस नए विवाद से यह साफ होता है कि व्यापार समझौते पर अंतिम सहमति अभी दूर है।
निष्कर्ष
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़ी संशोधित फैक्टशीट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कृषि और दालों का मुद्दा आने वाले समय में और विवादास्पद हो सकता है। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह वैश्विक व्यापार दबावों के बीच अपने किसानों और खाद्य सुरक्षा की रक्षा कैसे करता है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों देश बातचीत के जरिए संतुलित समाधान तक पहुंच पाते हैं या नहीं।
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